प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 19
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَامٍ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدَةُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَمَرَهُمْ أَمَرَهُمْ مِنْ الْأَعْمَالِ بِمَا يُطِيقُونَ قَالُوا إِنَّا لَسْنَا كَهَيْئَتِكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ قَدْ غَفَرَ لَكَ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ فَيَغْضَبُ حَتَّى يُعْرَفَ الْغَضَبُ فِي وَجْهِهِ ثُمَّ يَقُولُ إِنَّ أَتْقَاكُمْ وَأَعْلَمَكُمْ بِاللَّهِ أَنَا
मुहम्मद बिन सलाम ने हमसे कहा, अब्दुल्लाह ने हिशाम से अपने पिता से आयशा से कहा: "जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने साथियों को आदेश दिया, तो उन्होंने उन्हें ऐसे काम करने का आदेश दिया जो वे करने में सक्षम थे, तो साथियों ने कहा: "हम आपके जैसे नहीं हैं, ऐ रसूलल्लाह, क्योंकि आपके पिछले और भविष्य के पाप क्षमा कर दिए गए हैं।" तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को गुस्सा आया जो उनके चेहरे से देखा जा सकता था, फिर कहा: "वास्तव में, तुममें से सबसे अधिक पवित्र और अल्लाह को सबसे अधिक समझने वाला मैं हूं।"
समर्थक हदीस :
इमाम अहमद : 8245, 22915, 22994, 23059, 23111, 23147, 23186, 23399, 23487, 23645, 23675, 23819, 23988, 24153, 24260, 24267, 24299, 24382, 24386, 24451, 24590, 24755, 24772, 24845, 24882, 24901, 24928, 25170, 25186, 25274, 25493
इमाम बुखारी : 19, 41, 1064, 1082, 1083, 1834, 1851, 5413, 5980, 5981, 5984, 5985
इमाम मुस्लिम : 1225, 1234, 1235, 1302, 1303, 1304, 1305, 1306, 1307, 1308, 1958
इमाम अबू दाऊद : 1161, 1163
इमाम तिर्मिदज़ी : 2783
इमाम नसाई : 754, 1598, 1624
इमाम इब्नु माजा : 4228, 4230, 4231
इमाम मलिक : 240, 381