प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1494
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَابِسِ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّهُ جَاءَ إِلَى الْحَجَرِ الْأَسْوَدِ فَقَبَّلَهُ فَقَالَ إِنِّي أَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ لَا تَضُرُّ وَلَا تَنْفَعُ وَلَوْلَا أَنِّي رَأَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَبِّلُكَ مَا قَبَّلْتُكَ
[मुहम्मद बिन कसीर] ने हमें [सुफियान] [अल अमाश] से [इब्राहिम] से ['अबीस बिन रबी'आ] से ['उमर रदलिल्लाहु अन्हु] से बताया है कि वह हजर अल असवद के पास आए और उसे चूमा और फिर कहा: "वास्तव में मुझे पता है कि तुम बस एक पत्थर हो जो न तो नुकसान पहुंचा सकता है और न ही लाभ। लेकिन अगर ऐसा न होता कि मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को तुम्हें चूमते हुए देखा है, तो मैंने निश्चित रूप से तुम्हें चूमा नहीं होता।"