प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 5724
حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ الْفَضْلِ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي مَيْمُونَةَ عَنْ أَبِي رَافِعٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ زَيْنَبَ كَانَ اسْمُهَا بَرَّةَ فَقِيلَ تُزَكِّي نَفْسَهَا فَسَمَّاهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ زَيْنَبَ
हमसे वर्णित है कि [सदकाह बिन अल फदल] ने हमें [मुहम्मद बिन जाफर] से [स्यूबा] से [अथा` बिन अबू मैमुना] से [अबू रफी] से [अबू हुरैरा] से सूचित किया है कि ज़ैनब का (असली) नाम बर्रा है, तो उससे पूछा गया: "क्या तुम उसे पवित्र करना चाहती हो?" फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसका नाम ज़ैनब रखा।