प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 3088
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصِ بْنِ غِيَاثٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُرَّةَ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تُقْتَلُ نَفْسٌ ظُلْمًا إِلَّا كَانَ عَلَى ابْنِ آدَمَ الْأَوَّلِ كِفْلٌ مِنْ دَمِهَا لِأَنَّهُ أَوَّلُ مَنْ سَنَّ الْقَتْلَ
हमें बताया है ['उमर बिन हफ़्श बिन ग़ियात्स] ने हमें बताया है [मेरे पिता] ने हमें बताया है [अल अमासी] ने कहा कि उन्होंने मुझे बताया है ['अब्दुल्ला बिन मुर्रा] [मसरुक] से ['अब्दुल्ला रदियल्लाहु अन्हु] ने कहा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "एक भी आत्मा अन्यायपूर्वक नहीं मारी गई बल्कि आदम की पहली संतान ने रक्तपात के पाप को साझा किया क्योंकि वह हत्या का उदाहरण देने वाला पहला व्यक्ति था।"