प्रतिनिधि हदीस
इमाम मुस्लिम : 4036
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا و قَالَ ابْنُ حُجْرٍ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَخْبَرَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا لَا يَبِيتَنَّ رَجُلٌ عِنْدَ امْرَأَةٍ ثَيِّبٍ إِلَّا أَنْ يَكُونَ نَاكِحًا أَوْ ذَا مَحْرَمٍ
हमसे [याह्या बिन याह्या] ने कहा और [अली बिन हुज्र] ने कहा [याह्या]; हमें सूचित किया है। और [इब्न हुज्र] ने कहा; हमसे [हुसैय्यम] ने [अबू अज़ ज़ुबैर] से [जाबिर] से बताया है; इसी तरह, यह एक और मार्ग से वर्णित है; और हमसे [मुहम्मद बिन अश शब्बा] और [ज़ुहैर बिन हर्ब] दोनों ने कहा; हमसे [हुसैय्यम] ने बताया; हमसे [अबू अज़ ज़ुबैर] ने [जाबिर] से बताया है, उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यह जान लो! एक आदमी जो मुहरिम नहीं है वह विधवा महिला के घर में रात नहीं बिता सकता है, जब तक कि वह विवाहित न हो, या कोई मुहरिम न हो।"