प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 308
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْخَرَجْنَا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي حَجَّةِ الْوَدَاعِ فَمِنَّا مَنْ أَهَلَّ بِعُمْرَةٍ وَمِنَّا مَنْ أَهَلَّ بِحَجٍّ فَقَدِمْنَا مَكَّةَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَحْرَمَ بِعُمْرَةٍ وَلَمْ يُهْدِ فَلْيُحْلِلْ وَمَنْ أَحْرَمَ بِعُمْرَةٍ وَأَهْدَى فَلَا يُحِلُّ حَتَّى يُحِلَّ بِنَحْرِ هَدْيِهِ وَمَنْ أَهَلَّ بِحَجٍّ فَلْيُتِمَّ حَجَّهُ قَالَتْ فَحِضْتُ فَلَمْ أَزَلْ حَائِضًا حَتَّى كَانَ يَوْمُ عَرَفَةَ وَلَمْ أُهْلِلْ إِلَّا بِعُمْرَةٍ فَأَمَرَنِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ أَنْقُضَ رَأْسِي وَأَمْتَشِطَ وَأُهِلَّ بِحَجٍّ وَأَتْرُكَ الْعُمْرَةَ فَفَعَلْتُ ذَلِكَ حَتَّى قَضَيْتُ حَجِّي فَبَعَثَ مَعِي عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ وَأَمَرَنِي أَنْ أَعْتَمِرَ مَكَانَ عُمْرَتِي مِنْ التَّنْعِيمِ
हमसे कहा है [याह्या बिन बुकैर] ने, हमसे कहा है [अल लैत्स] ने ['उकैल] से [इब्न शिहाब] से ['उरवाह] से ['ऐस्या] ने कहा, "हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ वादा हज के दौरान निकले थे। हममें से कुछ लोग उमराह करते थे और कुछ लोग हज करते थे। जब हम मक्का पहुँचे, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई उमराह के लिए एहराम बांधता है और कुर्बानी नहीं लाता है, वह तहल्लुल हो। और जो कोई उमराह के लिए एहराम बांधता है और कुर्बानी लाता है, तो नहर (वध के दिन) में जानवर को ज़बह करने के बाद ही तहल्लुल करे। और जो हज से तल्बिआ करे, उसे अपना हज पूरा करना चाहिए।” आयशा ने कहा, “फिर मुझे पीरियड्स हुए और यह अराफात के दिन तक चला, और मैंने उमराह के अलावा तल्बिआ नहीं किया। तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे हुक्म दिया कि मैं अपने सिर के बाल सुलझा लूँ और कंघी करूँ, फिर हज करूँ और उमराह से निकल जाऊँ। तो मैंने ऐसा तब तक किया जब तक मेरा हज पूरा नहीं हो गया। फिर उन्होंने मेरे भाई, अब्दुर्रहमान बिन अबू बक्र को मेरे साथ भेजा और मुझे मेरे पिछले उमराह के बजाय तनीम से उमराह करने का हुक्म दिया।”