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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम नसाई : 932

أَخْبَرَنِي يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسٍ عَنْ أُبَيٍّ قَالَ مَا حَاكَ فِي صَدْرِي مُنْذُ أَسْلَمْتُ إِلَّا أَنِّي قَرَأْتُ آيَةً وَقَرَأَهَا آخَرُ غَيْرَ قِرَاءَتِي فَقُلْتُ أَقْرَأَنِيهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ الْآخَرُ أَقْرَأَنِيهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ يَا نَبِيَّ اللَّهِ أَقْرَأْتَنِي آيَةَ كَذَا وَكَذَا قَالَ نَعَمْ وَقَالَ الْآخَرُ أَلَمْ تُقْرِئْنِي آيَةَ كَذَا وَكَذَا قَالَ نَعَمْ إِنَّ جِبْرِيلَ وَمِيكَائِيلَ عَلَيْهِمَا السَّلَام أَتَيَانِي فَقَعَدَ جِبْرِيلُ عَنْ يَمِينِي وَمِيكَائِيلُ عَنْ يَسَارِي فَقَالَ جِبْرِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام اقْرَأْ الْقُرْآنَ عَلَى حَرْفٍ قَالَ مِيكَائِيلُ اسْتَزِدْهُ اسْتَزِدْهُ حَتَّى بَلَغَ سَبْعَةَ أَحْرُفٍ فَكُلُّ حَرْفٍ شَافٍ كَافٍ

उन्होंने मुझसे [याकूब बिन इब्राहीम] कहा; उन्होंने हमसे [यह्या] से [हुमैद] से [अनस] से [उबै] कहा; उन्होंने कहा; "जब से मैंने इस्लाम कबूल किया है, मेरे दिल में कोई शक नहीं रहा, सिवाय तब जब मैं कोई आयत पढ़ता हूँ और कोई और उसे पढ़ता है, लेकिन वह मेरे पढ़े हुए से अलग होती है। मैं कहता हूँ; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसे मेरे लिए पढ़ा है'। दूसरे कहते हैं, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी इसे मेरे लिए पढ़ा है!' यह आयत मुझे ऐसे और ऐसे पढ़कर सुनाओ?' उन्होंने जवाब दिया: 'हाँ। दूसरों ने भी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा, 'क्या आपने मुझे यह आयत ऐसे नहीं पढ़कर सुनाई? सच में, जिब्रील और मिकाइल मेरे पास आए हैं। जिब्रील मेरे दाईं ओर बैठे थे जबकि मिकाइल मेरे बाईं ओर बैठे थे। जिब्रील ने कहा, "कुरान को एक अक्षर से पढ़ो।" माइकल ने कहा; "सात अक्षर (बोलियाँ) जोड़ो। हर बोली काफ़ी है।

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इमाम अहमद : 20179
इमाम नसाई : 932