हदीस
Rabb kita tertawa terhadap hamba-nya yang berputus asa karena sadar dirinya lemah dan membutuhkan pertolongan
Imam Ibnu Majah : 177حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ عَنْ وَكِيعِ بْنِ حُدُسٍ عَنْ عَمِّهِ أَبِي رَزِينٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ضَحِكَ رَبُّنَا مِنْ قُنُوطِ عِبَادِهِ وَقُرْبِ غِيَرِهِ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَوَ يَضْحَكُ الرَّبُّ قَالَ نَعَمْ قُلْتُ لَنْ نَعْدَمَ مِنْ رَبٍّ يَضْحَكُ خَيْرًا
हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [यजीद बिन हारून] कहले बाड़े, हमनी के [हम्मद बिन सलामाह] से [या'ला बिन 'अथो`] से [वाकी' बिन हुदुस] से अपना चाचा [अबू रज़िन] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'हमार रब्ब अपना सेवकन के इबादत अवुरी उनुका ईर्ष्या के हद प हंसत बाड़े'। अबू रजिन कहले कि; हम पूछनी कि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, का रब्ब हंसत बाड़े?' ऊ जवाब दिहलन: ‘हँ, ठीक बा,’ हम कहनी: ‘हमेशा खातिर हमनी के भलाई मिल जाई अगर हमनी के रब्ब हँससु’.