हदीस
Sesungguhnya Allah itu maha indah, menyukai keindahan, tetapi kesombongan adalah menolak kebenaran dan meremehkan manusia
Imam Ahmad : 3600حَدَّثَنَا عَارِمٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُسْلِمٍ الْقَسْمَلِيُّ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ الْأَعْمَشُ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ جَعْدَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَدْخُلُ النَّارَ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ إِيمَانٍ وَلَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ كِبْرٍ فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي لَيُعْجِبُنِي أَنْ يَكُونَ ثَوْبِي غَسِيلًا وَرَأْسِي دَهِينًا وَشِرَاكُ نَعْلِي جَدِيدًا وَذَكَرَ أَشْيَاءَ حَتَّى ذَكَرَ عِلَاقَةَ سَوْطِهِ أَفَمِنْ الْكِبْرِ ذَاكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ لَا ذَاكَ الْجَمَالُ إِنَّ اللَّهَ جَمِيلٌ يُحِبُّ الْجَمَالَ وَلَكِنَّ الْكِبْرَ مَنْ سَفِهَ الْحَقَّ وَازْدَرَى النَّاسَ
हमनी के बतवले बाड़े ['अरीम] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल अजीज बिन मुस्लिम अल कस्माली] हमनी के [सुलेमान अल अ'मासी] [हबीब बिन अबू थाबीत] से [याह्या बिन जा'दाह] से [अब्दुल्लाह बिन मसौद] से बतवले बाड़े उ कहले कि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'जेकर इमान सरसों के दाना निहन भारी होखे, उ नरक में ना जाई, ना ही स्वर्ग में प्रवेश करी, जदी ओकरा दिल में सरसों के दाना निहन भारी अहंकार होखे।' एगो आदमी पूछलस; हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, सचमुच हमरा त तब नीक लागेला जब हम साफ-सुथरा कपड़ा पहिनले होखीं, माथा तेलदार होखे आ चप्पल के पट्टा नया होखे, ऊ अपना चाबुक के बान्हन के जिक्र तक ले सब कुछ बतवले, का ऊ अहंकार मानल जाला हे रसूलुल्लाह? उ कहले कि, 'ना, इ सुंदरता ह, सचमुच अल्लाह सुंदर हवे, सुंदरता से प्यार करेले, लेकिन अहंकार सच्चाई के नकारल अवुरी इंसान के छोट कईल ह'।