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Nabi memulai thawaf dari Hajar Aswad dan mengakhiri di situ pula
Imam Tirmidzi : 784حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَابِرٍ قَالَلَمَّا قَدِمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَكَّةَ دَخَلَ الْمَسْجِدَ فَاسْتَلَمَ الْحَجَرَ ثُمَّ مَضَى عَلَى يَمِينِهِ فَرَمَلَ ثَلَاثًا وَمَشَى أَرْبَعًا ثُمَّ أَتَى الْمَقَامَ فَقَالَ{ وَاتَّخِذُوا مِنْ مَقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى }فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ وَالْمَقَامُ بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْبَيْتِ ثُمَّ أَتَى الْحَجَرَ بَعْدَ الرَّكْعَتَيْنِ فَاسْتَلَمَهُ ثُمَّ خَرَجَ إِلَى الصَّفَا أَظُنُّهُ قَالَ{ إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِنْ شَعَائِرِ اللَّهِ }قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ جَابِرٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ
सानु दस्सेया है [महमूद बिन घैलन] ने सानु दस्सेया है [याह्या बिन आदम] ने सानु [सुफयान अस्त त्सौरी] [ज'फर बिन मुहम्मद] तों [उस दे पिता] तों [जबीर] तों दस्सेया है आख्या; 'जदूं नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का च पुज्जे तां ओह् अल हरम मस्जिद च दाखल होई गे, फिर उने काला पत्थर गी छुया जां चुम्मेआ, फिर इसदे दाएं पास्से चली पेआ। त्रै बारी जोग ते चार बारी चलना। फिर मकाम इब्राहिम दे कोल जाओ ते पढ़ो; 'और मकाम इब्राहिम गी नमाज दी जगह बनाओ'। फिर उसने दो रकाअत दी नमाज अपने ते काबा दे बीच मकाम दी पोजीशन दे नाल कीती। फिर उसने काले पत्थर दे कोल जा के उसगी चुम्मया। फिर सफा दी प्हाड़ी पर चली गया। मेनू लगदा है कि उस वक्त उसने आख्या सी 'इन्नाशशाफा वाल मरवाता मिन स्या'आइरिल्लाह -वास्तव च शफा ते मरवा अल्लाह दे निशान हन-'। -अबू ईसा तिरमिधी पर- ने कहा; 'सबसे सार्थक हदीस इब्न उमर कोला रिवायत होई ऐ'। अबू ईसा ने आख्या; 'जबीर हदीस हसन प्रामाणिक हदीस ऐ ते उलमाएं दा अमल कीता जंदा ऐ'।