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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Haji dan Umrah Bukit Shafa & Marwah Tidak boleh meninggalkan sa’i bagi yang berhaji atau berumroh

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Tidak boleh meninggalkan sa’i bagi yang berhaji atau berumroh
Imam Tirmidzi : 2891

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَال سَمِعْتُ الزُّهْرِيَّ يُحَدِّثُ عَنْ عُرْوَةَ قَالَ قُلْتُ لِعَائِشَةَ مَا أَرَى عَلَى أَحَدٍ لَمْ يَطُفْ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ شَيْئًا وَمَا أُبَالِي أَنْ لَا أَطُوفَ بَيْنَهُمَا فَقَالَتْ بِئْسَ مَا قُلْتَ يَا ابْنَ أُخْتِي طَافَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَطَافَ الْمُسْلِمُونَ وَإِنَّمَا كَانَ مَنْ أَهَلَّ لِمَنَاةَ الطَّاغِيَةِ الَّتِي بِالْمُشَلَّلِ لَا يَطُوفُونَ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى { فَمَنْ حَجَّ الْبَيْتَ أَوْ اعْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ أَنْ يَطَّوَّفَ بِهِمَا } وَلَوْ كَانَتْ كَمَا تَقُولُ لَكَانَتْ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ أَنْ لَا يَطَّوَّفَ بِهِمَا قَالَ الزُّهْرِيُّ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِأَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍ فَأَعْجَبَهُ ذَلِكَ وَقَالَ إِنَّ هَذَا الْعِلْمُ وَلَقَدْ سَمِعْتُ رِجَالًا مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ يَقُولُونَ إِنَّمَا كَانَ مَنْ لَا يَطُوفُ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ مِنْ الْعَرَبِ يَقُولُونَ إِنَّ طَوَافَنَا بَيْنَ هَذَيْنِ الْحَجَرَيْنِ مِنْ أَمْرِ الْجَاهِلِيَّةِ وَقَالَ آخَرُونَ مِنْ الْأَنْصَارِ إِنَّمَا أُمِرْنَا بِالطَّوَافِ بِالْبَيْتِ وَلَمْ نُؤْمَرْ بِهِ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى { إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِنْ شَعَائِرِ اللَّهِ } قَالَ أَبُو بَكْرِ بْنُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ فَأُرَاهَا قَدْ نَزَلَتْ فِي هَؤُلَاءِ وَهَؤُلَاءِ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ

[इब्न अबू उमर] हमनी के बतवले बाड़े [सुफयान] हमनी के बतवले बाड़े कि उ कहले बाड़े; हम [अज ज़ुहरी] के ['उरवाह] से बतवले सुनले बानी कि उ कहले रहले; हम ['आइशा] से कहनी; 'हमरा विचार से साफा अवुरी मरवाह के बीच सई ना करेवाला कवनो बात के जिम्मेदार नईखे अवुरी हमरा ओ लोग के बीच सई ना करे के कवनो परवाह नईखे'। 'ऐशा जवाब दिहली; 'तू जवन कहत बाड़ू उ बहुत खराब बा, हे भतीजा, अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सई कईले अवुरी मुसलमान भी सई कईले, वाकई में उ जे मुस्यालिल में - मक्का अवुरी मदीना के बीच के जगह जहां बहुत पानी होखेला - उहे नमाज के नमाज पढ़ेला। तब अल्लाह तबराका व तआला इ आयत जारी कईले कि, 'त जे भी घर में हज करेला या उमरा करेला, ओकरा प कवनो पाप नईखे कि उ लोग के बीच सई कईले बा'। प्र.स. अल-बकरा: 158. अगर रउआ जइसन बा, त बेशक आयत इ होई कि: 'तब ओकरा खातिर कवनो पाप नईखे कि उ दुनो के बीच सई ना करी'। अज ज़ुहरी कहले कि; हम एकर जिक्र अबू बकर बिन अब्दुररहमान बिन अल हरिथ बिन हिस्याम से कईले रहनी, जाहिर तौर प एकरा से उनुका हैरानी भईल, उ कहले; 'ई विज्ञान ह, आ हम कुछ विद्वान लोग के कहत सुनले बानी; 'अरब हलकन से जे लोग शफा अवुरी मरवाह के बीच सहमत नईखे, उ लोग कहतारे कि शफा अवुरी मरवाह के बीच हमनी के तवाफ अज्ञानता के बात बा'। जबकि कुछ लोग, अंसार से कहलस; 'हमनी के खाली बैतुल्लाह में तवाफ करे के आदेश दिहल गइल रहे आ हमनी के शफा आ मरवाह के बीच तवाफ करे के आदेश ना दिहल गइल रहे, तब अल्लाह तआला आयत के खुलासा कइले कि 'वास्तव में शफा आ मरवा अल्लाह के सियार के हिस्सा हवें'। क्यूएस अल-बकरा: 158. अबू बकर बिन अब्दुररहमान कहले कि; 'हमरा विचार से ई श्लोक ओह लोग आ ओह लोग के संबंध में प्रकट भइल रहे'। अबू ईसा कहले कि; इ हदीस हसन सहीह ह।

हदीस :


Imam Ahmad : 24717
Imam Muslim : 2241, 2242, 2243
Imam Tirmidzi : 2891