प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 381
حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ قَالَ سَأَلْنَا ابْنَ عُمَرَعَنْ رَجُلٍ طَافَ بِالْبَيْتِ الْعُمْرَةَ وَلَمْ يَطُفْ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ أَيَأْتِي امْرَأَتَهُ فَقَالَ قَدِمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَطَافَ بِالْبَيْتِ سَبْعًا وَصَلَّى خَلْفَ الْمَقَامِ رَكْعَتَيْنِ وَطَافَ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ وَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌوَسَأَلْنَا جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ فَقَالَ لَا يَقْرَبَنَّهَا حَتَّى يَطُوفَ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ
हमसे रिवायत है कि [अल हुमैद] ने कहा, हमसे रिवायत है कि [सुफ़यान] ने कहा, हमसे रिवायत है कि [अमरू बिन दीनार] ने कहा, “हमने एक बार [इब्न उमर] से एक ऐसे आदमी के बारे में पूछा जिसने उमराह के लिए काबा में तवाफ़ किया लेकिन सफ़ा और मरवा के बीच सई नहीं की। क्या उसके लिए अपनी पत्नी के साथ सहवास (जिमा) करना जायज़ है?” तो इब्न उमर ने कहा, “पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का आए, फिर काबा के चारों ओर सात बार तवाफ़ किया, मक़ाम के किनारे दो रकात नमाज़ पढ़ी, फिर सफ़ा और मरवा के बीच सई की। और सच में तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल एक अच्छे रोल मॉडल हैं।” और हमने एक बार [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से इस समस्या के बारे में पूछा। तो उन्होंने जवाब दिया, “अपनी पत्नी के पास तब तक न जाओ जब तक वह सफ़ा और मरवा की पहाड़ियों के बीच सई न कर ले।”