हदीस
Disunnahkan membaca “Innash-Shafaa wal-Marwata min Sya’aairillah” ketika memulai sa’i
Imam Nasa'i : 2921أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَنْبَأَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ حَدَّثَنَا جَابِرٌ قَالَخَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ إِلَى الصَّفَا وَقَالَ نَبْدَأُ بِمَا بَدَأَ اللَّهُ بِهِ ثُمَّ قَرَأَ{ إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِنْ شَعَائِرِ اللَّهِ }
हमनी के [या'कुब बिन इब्राहिम] के जानकारी देके उ कहले कि; उ कहले कि, [जफर बिन मुहम्मद] से हमनी के [याह्या बिन सईद] के रिपोर्ट कईले बाड़े; हमरा [हमार बाबूजी] के बतवले रहले, उ कहले; हमनी के [जाबीर] के बतवले बाड़े, उ कहले; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शफा के पास निकल के कहले कि हमनी के शुरुआत उहे से करेनी जा जवन अल्लाह शुरू कईले बाड़े। तब उ इन्नाश शफा वाल मरवाता मिन स्या'आइरिल्लाह पढ़ले।