हदीस
Diperlihatkan Neraka, penghuninya mayoritas wanita karena kufur terhadap suami
Imam Bukhari : 1136حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُقَاتِلٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ أَخْبَرَنَا يُونُسُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ قَالَ قَالَتْ عَائِشَةُخَسَفَتْ الشَّمْسُ فَقَامَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَرَأَ سُورَةً طَوِيلَةً ثُمَّ رَكَعَ فَأَطَالَ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ ثُمَّ اسْتَفْتَحَ بِسُورَةٍ أُخْرَى ثُمَّ رَكَعَ حَتَّى قَضَاهَا وَسَجَدَ ثُمَّ فَعَلَ ذَلِكَ فِي الثَّانِيَةِ ثُمَّ قَالَ إِنَّهُمَا آيَتَانِ مِنْ آيَاتِ اللَّهِ فَإِذَا رَأَيْتُمْ ذَلِكَ فَصَلُّوا حَتَّى يُفْرَجَ عَنْكُمْ لَقَدْ رَأَيْتُ فِي مَقَامِي هَذَا كُلَّ شَيْءٍ وُعِدْتُهُ حَتَّى لَقَدْ رَأَيْتُ أُرِيدُ أَنْ آخُذَ قِطْفًا مِنْ الْجَنَّةِ حِينَ رَأَيْتُمُونِي جَعَلْتُ أَتَقَدَّمُ وَلَقَدْ رَأَيْتُ جَهَنَّمَ يَحْطِمُ بَعْضُهَا بَعْضًا حِينَ رَأَيْتُمُونِي تَأَخَّرْتُ وَرَأَيْتُ فِيهَا عَمْرَو بْنَ لُحَيٍّ وَهُوَ الَّذِي سَيَّبَ السَّوَائِبَ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन मुकातिल] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल्लाह] हमनी के [यूनुस] से [अज जुहरी] से [उरवाह] से बतवले बाड़े कहले बाड़े; कहलन, [आइशाह र.ह.उ.]: 'जब सूर्यग्रहण भइल त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज पढ़े खातिर खड़ा हो गइलन, ऊ एगो लमहर पाठ पढ़ले फिर लंबा धनुष से प्रणाम कइले फिर आपन माथा उठवले फिर एगो अउरी सूरह पढ़े लगले, फिर फिर से प्रणाम कइले जब तक कि ऊ पूरा ना हो गइले आ फिर सजदा कइले। फिर दूसरा रकाअत में फिर से उहे कईले फिर खतम कईला के बाद उ कहले कि इ दुनो अल्लाह के महानता के दुगो निशानी ह। अगर ग्रहण देखनी त तब तक प्रार्थना करीं जब तक कि ग्रहण आपके से गायब ना हो जाव। सचहूँ हम जहाँ खड़ा बानी ओहिजा से ऊ सब कुछ देखले बानी जवन हमरा से उनुका से वादा कइले बा, जेहसे कि हम स्वर्ग में अंगूर के गुच्छा लेबे के चाहत बानी, लागत बा कि जब रउरा हमरा के देखब त हम आगे बढ़ल चाहत बानी. आ साँचहू हम नरक देखनी जवना के लपट एक दोसरा के जरत रहे जबले रउरा हमरा के देखत रहीं, हम पीछे हट गइनी आ ओहमें देखनी कि ‘अमरू बिन लुहाई आ ऊ सबसे पहिले सैबाह बनवले रहले’.
हदीस :
Imam Ahmad : 2576, 3202, 6195, 13897, 17441, 19131, 24815, 24910, 25128, 25688, 25724, 25725, 25752
Imam Bukhari : 28, 84, 178, 413, 703, 706, 993, 994, 1136, 2191, 4258, 6743
Imam Muslim : 114, 1500, 1508, 1509, 1510, 1512
Imam Abu Dawud : 996
Imam Tirmidzi : 2235
Imam Nasa'i : 1455, 2035
Imam Malik : 398, 399, 401