प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 5944
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ عَمْرٍو عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَقُولُ اللَّهُ تَعَالَى مَا لِعَبْدِي الْمُؤْمِنِ عِنْدِي جَزَاءٌ إِذَا قَبَضْتُ صَفِيَّهُ مِنْ أَهْلِ الدُّنْيَا ثُمَّ احْتَسَبَهُ إِلَّا الْجَنَّةُ
हमें [कुतैबा] ने बताया है कि हमें [याकूब बिन अब्दुर्रहमान] ['अमरू] से [सईद अल मकबूरी] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अल्लाह तआला कहते हैं: 'मेरे पास मेरे उस बन्दे के लिए कोई उचित इनाम नहीं है जो ईमान लाए, अगर मैं इस दुनिया में उसके किसी प्रियजन की जान ले लूं, तो वह स्वर्ग के अलावा तैयार और धैर्यवान है।'"