प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 2829
وَقَالَ سَالِمٌ قَالَ ابْنُ عُمَرَثُمَّ قَامَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي النَّاسِ فَأَثْنَى عَلَى اللَّهِ بِمَا هُوَ أَهْلُهُ ثُمَّ ذَكَرَ الدَّجَّالَ فَقَالَ إِنِّي أُنْذِرُكُمُوهُ وَمَا مِنْ نَبِيٍّ إِلَّا قَدْ أَنْذَرَهُ قَوْمَهُ لَقَدْ أَنْذَرَهُ نُوحٌ قَوْمَهُ وَلَكِنْ سَأَقُولُ لَكُمْ فِيهِ قَوْلًا لَمْ يَقُلْهُ نَبِيٌّ لِقَوْمِهِ تَعْلَمُونَ أَنَّهُ أَعْوَرُ وَأَنَّ اللَّهَ لَيْسَ بِأَعْوَرَ
और (पिछली हदीस की तरह ही) [सलीम] ने कहा, [इब्न उमर रदियल्लाहु अन्हुमा] ने कहा; "फिर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगों के सामने खड़े हुए, फिर अल्लाह की तारीफ़ की, जो तारीफ़ के लायक है, फिर उन्होंने अद-दज्जाल की समस्या का ज़िक्र किया और कहा: "सच में मैं तुम्हें उसकी याद दिलाता हूँ और कोई भी पैगंबर ऐसा नहीं है जिसने अपने लोगों को दज्जाल के बारे में याद दिलाया हो। बेशक, पैगंबर नूह अलैहिस्सलाम ने अपने लोगों को याद दिलाया है। हालाँकि, मैं तुम्हें एक ऐसी बात बताता हूँ जो (मुझसे पहले) पैगंबरों ने कभी नहीं कही, यानी कि अद-दज्जाल एक आँख से अंधा है और बेशक अल्लाह एक आँख से अंधा नहीं है।"