प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1322
حَدَّثَنَا آدَمُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ حَدَّثَنَا مَعْبَدُ بْنُ خَالِدٍ قَالَ سَمِعْتُ حَارِثَةَ بْنَ وَهْبٍ قَالَسَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ تَصَدَّقُوا فَإِنَّهُ يَأْتِي عَلَيْكُمْ زَمَانٌ يَمْشِي الرَّجُلُ بِصَدَقَتِهِ فَلَا يَجِدُ مَنْ يَقْبَلُهَا يَقُولُ الرَّجُلُ لَوْ جِئْتَ بِهَا بِالْأَمْسِ لَقَبِلْتُهَا فَأَمَّا الْيَوْمَ فَلَا حَاجَةَ لِي بِهَا
हमसे कहा है [आदम] ने हमसे कहा है [स्यूबा] ने हमसे कहा है [मबाद बिन खालिद] ने कहा; मैंने [हरित्साह बिन वहाब] को कहते सुना; मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना: "सदका करो, क्योंकि भविष्य में तुम्हारे पास एक समय आएगा जब कोई अपना शदका लेकर घूमेगा लेकिन उसे कोई स्वीकार करने वाला नहीं मिलेगा। तब किसी ने कहा, "अगर तुम इसे कल लाने आए होते तो मैं इसे स्वीकार कर लेता। आज मुझे इसकी ज़रूरत नहीं है।"