प्रतिनिधि हदीस
इमाम तिर्मिदज़ी : 1860
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الشَّيْطَانَ قَدْ يَئِسَ أَنْ يَعْبُدَهُ الْمُصَلُّونَ وَلَكِنْ فِي التَّحْرِيشِ بَيْنَهُمْقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَنَسٍ وَسُلَيْمَانَ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْأَحْوَصِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ وَأَبُو سُفْيَانَ اسْمُهُ طَلْحَةُ بْنُ نَافِعٍ
हमें [हन्नाद] ने बताया, हमें [अबू मुअविया] ने [अल अमासी] से [अबू सुफ़यान] से [जाबिर] से बताया; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "बेशक, शैतान ने उम्मीद छोड़ दी है कि इबादत करने वाले उसकी पूजा करेंगे। लेकिन वह उनके बीच दुश्मनी को बढ़ावा दे रहा है।" मतलब वाली हदीस अनस और सुलेमान बिन अम्र बिन अल अहवाश से उनके पिता से भी सुनाई गई थी। अबू ईसा ने कहा; यह हसन की हदीस है। और अबू सुफ़यान का नाम थलहा बिन नफी है।