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Rasulullah SAW berlindung dari adzab kubur dalam setiap shalatnya
Imam Nasa'i : 1459أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ هُوَ الْأَنْصَارِيُّ قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَةَ قَالَتْ سَمِعْتُ عَائِشَةَ تَقُولُجَاءَتْنِي يَهُودِيَّةٌ تَسْأَلُنِي فَقَالَتْ أَعَاذَكِ اللَّهُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ فَلَمَّا جَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيُعَذَّبُ النَّاسُ فِي الْقُبُورِ فَقَالَ عَائِذًا بِاللَّهِ فَرَكِبَ مَرْكَبًا يَعْنِي وَانْخَسَفَتْ الشَّمْسُ فَكُنْتُ بَيْنَ الْحُجَرِ مَعَ نِسْوَةٍ فَجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ مَرْكَبِهِ فَأَتَى مُصَلَّاهُ فَصَلَّى بِالنَّاسِ فَقَامَ فَأَطَالَ الْقِيَامَ ثُمَّ رَكَعَ فَأَطَالَ الرُّكُوعَ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ فَأَطَالَ الْقِيَامَ ثُمَّ رَكَعَ فَأَطَالَ الرُّكُوعَ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ فَأَطَالَ الْقِيَامَ ثُمَّ سَجَدَ فَأَطَالَ السُّجُودَ ثُمَّ قَامَ قِيَامًا أَيْسَرَ مِنْ قِيَامِهِ الْأَوَّلِ ثُمَّ رَكَعَ أَيْسَرَ مِنْ رُكُوعِهِ الْأَوَّلِ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ فَقَامَ أَيْسَرَ مِنْ قِيَامِهِ الْأَوَّلِ ثُمَّ رَكَعَ أَيْسَرَ مِنْ رُكُوعِهِ الْأَوَّلِ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ فَقَامَ أَيْسَرَ مِنْ قِيَامِهِ الْأَوَّلِ فَكَانَتْ أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ وَأَرْبَعَ سَجَدَاتٍ وَانْجَلَتْ الشَّمْسُ فَقَالَ إِنَّكُمْ تُفْتَنُونَ فِي الْقُبُورِ كَفِتْنَةِ الدَّجَّالِ قَالَتْ عَائِشَةُ فَسَمِعْتُهُ بَعْدَ ذَلِكَ يَتَعَوَّذُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ
हमरा सभ [अमरू बिन अली] केँ रिपोर्ट क’ ओ कहलनि; हमरा सभकेँ [याह्या बिन सईद] कहलक अछि जे ओ कहलनि; हमरा सब के [याह्या बिन सईद अल अंसारी] के कहने छथि जे ओ कहलनि; हम ['अमरह] केँ कहैत सुनलहुँ; हम ['ऐशा] कहैत सुनलहुँ; एकटा यहूदी हमरा लग आबि कहलक। 'अल्लाह अहाँ के कब्र के यातना स बचाबय'। रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अयला के बाद हम हुनका कहलियनि जे हे रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम, की मनुष्य के कब्र में रहला पर यातना देल जायत? ' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'अल्लाह के शरण मे रहू!' तखन ओ अपन वाहन पर चढ़ल, तखन सूर्यग्रहण भेल। हम महिला सब के संग कोठली में छलहुं, तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन गाड़ी स आबि अपन नमाज स्थल पर प्रवेश केलनि, फेर लोक के संग नमाज पढ़लनि। तखन ओ ठाढ़ भ’ गेलाह, फेर बहुत देर धरि प्रणाम केलनि। फेर माथ उठौलक आ बहुत देर धरि ठाढ़ रहल। फेर बहुत देर धरि प्रणाम केलनि, फेर माथ उठौलनि आ बहुत देर धरि ठाढ़ रहलाह। तखन बहुत देर धरि सजदा करू, आ फेर ठाढ़ भ' जाउ मुदा पहिल ठाढ़ि सँ छोट। तखन पहिल धनुषसँ छोट धनुषसँ प्रणाम करू , फेर माथ उठबैत फेर ठाढ़ भऽ जाउ मुदा पहिल धनुषसँ छोट। तखन फेर प्रणाम करू जे पहिल धनुषसँ छोट अछि , तखन माथ उठा कऽ ठाढ़ भऽ जाउ मुदा पहिल धनुषसँ हल्लुक। नमाज चारि बेर प्रणाम आ चारि बेर सजदा भेल, आ सूर्य उज्ज्वल छल। तकर बाद ओ बजलाह : ‘अहाँक परीक्षा चिता मे होयत, जेना दज्जालक निन्दा। तखन आइशा बजलीह; 'हम सुनलहुँ जे ओकर बाद कब्रक यातना सँ रक्षा मँगैत छल' ।