प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1185
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُقَاتِلٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ أَخْبَرَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَاأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُفِّنَ فِي ثَلَاثَةِ أَثْوَابٍ يَمَانِيَةٍ بِيضٍ سَحُولِيَّةٍ مِنْ كُرْسُفٍ لَيْسَ فِيهِنَّ قَمِيصٌ وَلَا عِمَامَةٌ
हमें बताया है [मुहम्मद बिन मुक़ातिल] ने हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन अल मुबारक] ने हमें [हिशाम बिन उरवाह] ने [अपने पिता] से [आयशा रदियल्लाहु अन्हा] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (जब उनकी मृत्यु हुई) को यमन की धरती से कपास से बने तीन बहुत ही सफेद कपड़े के टुकड़ों में लपेटा गया था और उन्होंने कपड़े या पगड़ी (सिर ढंकने वाली चीज़) नहीं पहनी थी।