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Rasulullah SAW bersabda: Siapa yang akhir kalimatnya La ilaha illallah, maka ia masuk surga
Imam Muslim : 138حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَأَحْمَدُ بْنُ خِرَاشٍ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ حَدَّثَنِي حُسَيْنٌ الْمُعَلِّمُ عَنْ ابْنِ بُرَيْدَةَ أَنَّ يَحْيَى بْنَ يَعْمَرَ حَدَّثَهُ أَنَّ أَبَا الْأَسْوَدِ الدِّيلِيَّ حَدَّثَهُ أَنَّ أَبَا ذَرٍّ حَدَّثَهُ قَالَ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ نَائِمٌ عَلَيْهِ ثَوْبٌ أَبْيَضُ ثُمَّ أَتَيْتُهُ فَإِذَا هُوَ نَائِمٌ ثُمَّ أَتَيْتُهُ وَقَدْ اسْتَيْقَظَ فَجَلَسْتُ إِلَيْهِ فَقَالَ مَا مِنْ عَبْدٍ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ ثُمَّ مَاتَ عَلَى ذَلِكَ إِلَّا دَخَلَ الْجَنَّةَ قُلْتُ وَإِنْ زَنَى وَإِنْ سَرَقَ قَالَ وَإِنْ زَنَى وَإِنْ سَرَقَ قُلْتُ وَإِنْ زَنَى وَإِنْ سَرَقَ قَالَ وَإِنْ زَنَى وَإِنْ سَرَقَ ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ فِي الرَّابِعَةِ عَلَى رَغْمِ أَنْفِ أَبِي ذَرٍّ قَالَ فَخَرَجَ أَبُو ذَرٍّ وَهُوَ يَقُولُ وَإِنْ رَغِمَ أَنْفُ أَبِي ذَرٍّ
हमरा सब के कहलक अछि [जुहैर बिन हरब] आ [अहमद बिन खिरासी] दुनू गोटे कहलनि, हमरा सब के कहने छथि [अब्द अश-शमद बिन अब्द अल-वारित्स] हमरा सब के [हमर पिता] के कहने छथि, हमरा सब के [हुसैन अल-मुअल्लीम] के [इब्न बुराइदा] स कहने छथि जे [याह्या बिन यामर] हुनका कहने छथि, जे [अबुल अल-असवद अद-दैलामी] हुनका कहने छथि, जे [अबू ज़ार] हुनका कहने छलाह, ओ कहलनि, 'हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग आयल छलहुँ जे ओहि समय सुतल छलाह, आ ओ उज्जर कपड़ा पहिरने छलाह | फेर जखन हम हुनका लग -पुनः- अयलहुँ तऽ ओ एखनो सुतल छलाह, तखन जखन हम फेर हुनका लग आयल छलहुँ तखन ओ जागल छलाह । हम तखन हुनका मुँहे बैसल रही, ओ तखन कहलनि: 'कोनो सेवक नहि अछि जे कहय, 'अल्लाह के छोड़ि कोनो देवता - इबादत के योग्य - नहिं', तखन ओ ओहि बात के मजबूती सं पकड़ि क' मरि जाइत छथि, मुदा ओ स्वर्ग मे अवश्य प्रवेश करताह'. हम पुछलियनि, 'भले ओ व्यभिचार आ चोरी करैत अछि'। ओ उत्तर देलनि: 'भले ओ व्यभिचार आ चोरी करैत अछि'। हम पुछलियनि, 'भले ओ व्यभिचार आ चोरी करैत अछि'। ओ उत्तर देलनि: 'भले ओ व्यभिचार आ चोरी करैत अछि'। तीन बेर। तखन चारिम बेर ओ कहलनि: 'भले अबू ज़ार असहमत होथि'। कथावाचक कहलनि, 'अबू ज़ार बाहर आबि गेलाह, जखन कि ओ कहलनि, 'भले अबू ज़ार सहमत नहि होथि'।