प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1732
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَامٍ أَخْبَرَنَا الْفَزَارِيُّ عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ قَالَ حَدَّثَنِي ثَابِتٌ عَنْ أَنَسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى شَيْخًا يُهَادَى بَيْنَ ابْنَيْهِ قَالَ مَا بَالُ هَذَا قَالُوا نَذَرَ أَنْ يَمْشِيَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ عَنْ تَعْذِيبِ هَذَا نَفْسَهُ لَغَنِيٌّ وَأَمَرَهُ أَنْ يَرْكَبَ
मुहम्मद बिन सलाम ने हमें बताया है कि अल-फ़ज़री ने हुमैद अथ-तौविल से कहा है, और मुझे अनस रदियल्लाहु अन्हु से त्साबित ने बताया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बूढ़े आदमी को अपने दो बच्चों के सहारे चलते देखा, तो उन्होंने पूछा: "इस आदमी ने ऐसा क्यों किया?" उन्होंने जवाब दिया: "इसने (मक्का तक) चलने की कसम खाई है।" तो उन्होंने कहा: "अल्लाह को इस आदमी को खुद को तकलीफ़ देने की ज़रूरत नहीं है।" तो उन्होंने उस आदमी को सवारी करने का आदेश दिया।