प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 2186
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ عَنْ الْأَعْمَشِ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا صَالِحٍ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثَةٌ لَا يَنْظُرُ اللَّهُ إِلَيْهِمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ رَجُلٌ كَانَ لَهُ فَضْلُ مَاءٍ بِالطَّرِيقِ فَمَنَعَهُ مِنْ ابْنِ السَّبِيلِ وَرَجُلٌ بَايَعَ إِمَامًا لَا يُبَايِعُهُ إِلَّا لِدُنْيَا فَإِنْ أَعْطَاهُ مِنْهَا رَضِيَ وَإِنْ لَمْ يُعْطِهِ مِنْهَا سَخِطَ وَرَجُلٌ أَقَامَ سِلْعَتَهُ بَعْدَ الْعَصْرِ فَقَالَ وَاللَّهِ الَّذِي لَا إِلَهَ غَيْرُهُ لَقَدْ أَعْطَيْتُ بِهَا كَذَا وَكَذَا فَصَدَّقَهُ رَجُلٌ ثُمَّ قَرَأَ هَذِهِ الْآيَةَ{ إِنَّ الَّذِينَ يَشْتَرُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ وَأَيْمَانِهِمْ ثَمَنًا قَلِيلًا }
मूसा बिन इस्माइल ने हमें बताया है कि अब्दुल वहीद बिन ज़ियाद ने अल अमासी से कहा, मैंने अबू सलेह को कहते सुना, मैंने अबू हुरैरा रदियल्लाहु अन्हु को कहते सुना; रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "तीन तरह के लोग हैं जिन पर अल्लाह तआला क़ियामत के दिन नज़र नहीं डालेगा और उन्हें पाक नहीं करेगा और जिनके लिए दर्दनाक सज़ा तैयार है, यानी वो जिसके पास रास्ते में ज़्यादा पानी हो और वो उसे मुसाफ़िर को न दे, वो जो इमाम की बैअत करे और वो दुनियावी फ़ायदों के अलावा उसकी बैअत न करे, अगर उसे दुनिया दी जाए तो वो खुश हो और अगर न दी जाए तो नाराज़ हो और कोई जो अस्र के बाद अपना माल बेचे तो वो कसम खाए; अल्लाह की कसम, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, मैंने यह और वो दिया फिर उसकी कसम किसी और ने पक्की कर दी।" फिर उन्होंने यह आयत पढ़ी: जिसका मतलब है ("असल में, जो लोग अल्लाह से अपने वादे और अपनी कसमें थोड़ी सी कीमत पर बदल लेते हैं...")।