प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 6352
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ فُضَيْلِ بْنِ غَزْوَانَ عَنْ ابْنِ أَبِي نُعْمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَسَمِعْتُ أَبَا الْقَاسِمِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ قَذَفَ مَمْلُوكَهُ وَهُوَ بَرِيءٌ مِمَّا قَالَ جُلِدَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِلَّا أَنْ يَكُونَ كَمَا قَالَ
हमें बताया है [मुसद्दद] ने हमें बताया है [याह्या बिन सईद] [फुदैल बिन ग़ज़ावान] से [इब्न अबी नुअम] से [अबू हुरैरा] रदियल्लाहु अन्हु ने कहा; मैंने अबुल कासिम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना; "जो कोई अपने गुलाम पर व्यभिचार का आरोप लगाता है, जबकि वह खुद नहीं कहता कि वह क्या कह रहा है, तो आरोप लगाने वाले को क़यामत के दिन सज़ा दी जाएगी, जब तक कि वह सच-सच न कह दे।"