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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Perbudakan Dosa Budak Pernikahan budak tanpa izin tuannya adalah zina

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Pernikahan budak tanpa izin tuannya adalah zina
Imam Tirmidzi : 1029

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ أَخْبَرَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ زُهَيْرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَيُّمَا عَبْدٍ تَزَوَّجَ بِغَيْرِ إِذْنِ سَيِّدِهِ فَهُوَ عَاهِرٌقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ جَابِرٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ وَرَوَى بَعْضُهُمْ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَا يَصِحُّ وَالصَّحِيحُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ عَنْ جَابِرٍ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَيْرِهِمْ أَنَّ نِكَاحَ الْعَبْدِ بِغَيْرِ إِذْنِ سَيِّدِهِ لَا يَجُوزُ وَهُوَ قَوْلُ أَحْمَدَ وَإِسْحَقَ وَغَيْرِهِمَا بِلَا اخْتِلَافٍ

हमनी के [अली बिन हुजर] के बतावल गईल बा, हमनी के [अल वलीद बिन मुस्लिम] के [जुहैर बिन मुहम्मद] से [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अकील] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से बतावल गईल बा, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहले कि, 'कवनो गुलाम जवन बिना अपना रखवाला के अनुमति के बियाह करेला, उ व्यभिचारी होखेला'। -अबू ईसा तिरमिधी में- कहले; 'सबसे सार्थक हदीस इब्न उमर से रिवायत भइल बा'। अबू ईसा कहले कि; 'हदीस असल में जबीर हदीस से रिवायत बा, आ हसन हदीस ह।' ओहमें से कुछ लोग के तर्क बा कि ई हदीस [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अकील] से [इब्न उमर] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से आइल बा, बाकिर ई मान्य नइखे. प्रामाणिक वाला जाबीर से अब्दुल्ला बिन मुहम्मद बिन अकील के ह। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथी लोग आ अउरी लोग के बीच के विद्वान लोग एह बात के अमल करत रहे कि गुलाम के बियाह बिना ओकर रखवाला के अनुमति के कइल जायज ना होला। इहे अहमद आ इशाक, आ अउरी लोग के भी राय बा, बिना कवनो मतभेद के।

हदीस :

Imam Ahmad : 13696, 14500, 14560
Imam Abu Dawud : 1779
Imam Tirmidzi : 1029, 1030
Imam Ibnu Majah : 1950
Imam Darimi : 2136