Hadith Representative
Ampunan Allah atas taubat bagi pembunuh seratus orang
Imam Ibnu Majah : 2612حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا هَمَّامُ بْنُ يَحْيَى عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي الصِّدِّيقِ النَّاجِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَأَلَا أُخْبِرُكُمْ بِمَا سَمِعْتُ مِنْ فِي رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَمِعَتْهُ أُذُنَايَ وَوَعَاهُ قَلْبِي إِنَّ عَبْدًا قَتَلَ تِسْعَةً وَتِسْعِينَ نَفْسًا ثُمَّ عَرَضَتْ لَهُ التَّوْبَةُ فَسَأَلَ عَنْ أَعْلَمِ أَهْلِ الْأَرْضِ فَدُلَّ عَلَى رَجُلٍ فَأَتَاهُ فَقَالَ إِنِّي قَتَلْتُ تِسْعَةً وَتِسْعِينَ نَفْسًا فَهَلْ لِي مِنْ تَوْبَةٍ قَالَ بَعْدَ تِسْعَةٍ وَتِسْعِينَ نَفْسًا قَالَ فَانْتَضَى سَيْفَهُ فَقَتَلَهُ فَأَكْمَلَ بِهِ الْمِائَةَ ثُمَّ عَرَضَتْ لَهُ التَّوْبَةُ فَسَأَلَ عَنْ أَعْلَمِ أَهْلِ الْأَرْضِ فَدُلَّ عَلَى رَجُلٍ فَأَتَاهُ فَقَالَ إِنِّي قَتَلْتُ مِائَةَ نَفْسٍ فَهَلْ لِي مِنْ تَوْبَةٍ فَقَالَ وَيْحَكَ وَمَنْ يَحُولُ بَيْنَكَ وَبَيْنَ التَّوْبَةِ اخْرُجْ مِنْ الْقَرْيَةِ الْخَبِيثَةِ الَّتِي أَنْتَ فِيهَا إِلَى الْقَرْيَةِ الصَّالِحَةِ قَرْيَةِ كَذَا وَكَذَا فَاعْبُدْ رَبَّكَ فِيهَا فَخَرَجَ يُرِيدُ الْقَرْيَةَ الصَّالِحَةَ فَعَرَضَ لَهُ أَجَلُهُ فِي الطَّرِيقِ فَاخْتَصَمَتْ فِيهِ مَلَائِكَةُ الرَّحْمَةِ وَمَلَائِكَةُ الْعَذَابِ قَالَ إِبْلِيسُ أَنَا أَوْلَى بِهِ إِنَّهُ لَمْ يَعْصِنِي سَاعَةً قَطُّ قَالَ فَقَالَتْ مَلَائِكَةُ الرَّحْمَةِ إِنَّهُ خَرَجَ تَائِبًاقَالَ هَمَّامٌ فَحَدَّثَنِي حُمَيْدٌ الطَّوِيلُ عَنْ بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِي رَافِعٍ قَالَ فَبَعَثَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ مَلَكًا فَاخْتَصَمُوا إِلَيْهِ ثُمَّ رَجَعُوا فَقَالَ انْظُرُوا أَيَّ الْقَرْيَتَيْنِ كَانَتْ أَقْرَبَ فَأَلْحِقُوهُ بِأَهْلِهَا قَالَ قَتَادَةُ فَحَدَّثَنَا الْحَسَنُ قَالَ لَمَّا حَضَرَهُ الْمَوْتُ احْتَفَزَ بِنَفْسِهِ فَقَرُبَ مِنْ الْقَرْيَةِ الصَّالِحَةِ وَبَاعَدَ مِنْهُ الْقَرْيَةَ الْخَبِيثَةَ فَأَلْحَقُوهُ بِأَهْلِ الْقَرْيَةِ الصَّالِحَةِ حَدَّثَنَا أَبُو الْعَبَّاسِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ إِسْمَعِيلَ الْبَغْدَادِيُّ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ فَذَكَرَ نَحْوَهُ
हमरा सभकेँ [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [यजीद बिन हारून] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [हम्माम बिन याह्या] [कतादह]सँ [अबू शिद्दीक अन नाजी]सँ [अबू सईद अल खुदरी]सँ कहलक अछि, ओ कहलनि; 'की हम अहाँ के किछु एहन बात नहि कहय चाहैत छी जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मुँह स निकलल छल? हम दुनू कानसँ सुनलहुँ आ मोन हुनकर बात सुनलनि , ओ बजलाह : ‘सत्ते कियो एहन छल जे उननबे लोकक हत्या कएने छल, तखन ओ पश्चाताप करय चाहैत छल, तखन ओ एहि धरतीक मुँह पर सबसँ पुण्य व्यक्तिक विषय मे पुछलक। तखन ककरो देखाओल गेल। ओ हुनका लग आबि कहलनि; 'हम उननबे गोटेकेँ मारि देलहुँ, हमरा लेल एखनो कोनो पश्चाताप अछि की? ओ व्यक्ति आश्चर्यचकित स्वर मे बाजल-की? उननबे लोक के मारि देलक अछि?' ओ आगू बजलाह; 'अंत मे हत्यारा अपन तलवार निकालि ओहि आदमी केँ मारि देलक।' एहि तरहेँ ओ सौ लोकक हत्या कऽ देलक। ओ एखनो पश्चाताप चाहैत छलाह आ पृथ्वी पर सबसँ पुण्य व्यक्तिक विषय मे पूछैत छलाह | तखन ककरो देखाओल गेलनि आ ओ हुनका लग आबि गेलाह । ओ पुछलकै; 'हम सौ लोककेँ मारि देने छी, तखन हमरा लेल एखनो पश्चाताप अछि की?' पुण्यात्मा उत्तर देलक; 'अहाँक धिक्कार! अहाँकेँ पश्चाताप करबासँ के रोकि सकैत अछि? अहाँ जाहि खराब गाम मे रहैत छी ताहि सँ बाहर निकलू आ नीक गाम मे चलि जाउ, अर्थात ई गाम आ ई। ओतय अपन भगवानक पूजा करू। ' तखन हत्यारा नीक गाम दिस निकलि गेल, मुदा मृत्यु ओकरा रस्ता मे पकड़ि लेलक। तखन दयाक दूत आ दण्डक दूत एक दोसरा सँ टकरा गेल। शैतान कहलक; 'हमहीं छी जिनका एहि व्यक्ति पर बेसी अधिकार अछि, ओ कहियो हमर आदेशक विरोध एकदम नहि केने छथि ।' दयाक दूत उत्तर देलथिन, 'ओ पश्चाताप करबाक लेल बाहर आबि गेल छथि'। [हम्मम] कहलनि; हमरा [हुमैद अत थाविल] कहने छथि, [बकर बिन अब्दुल्लाह] सँ [अबू रफी'] सँ कहने छथि, ओ रिवायत केलनि; अल्लाह सुब्हानाहु वताला फरिश्ता पठौलनि, एहि बात पर झगड़ा केलनि आ फेर वापस आबि गेलाह | अल्लाह सुब्हानाहु वताला तखन कहलनि, देखू, दुनू गाम मे सँ कोन गाम हुनका सँ बेसी नजदीक अछि - दुष्ट गाम वा नीक गाम -? तखन ओकरा गामक निवासी मे वर्गीकृत करू'। [कतादह] कहलक; हमरा सभकेँ [अल हसन] कहने छथि, ओ कहलनि, 'जखन हुनका मृत्यु भेलनि तखन ओ नीक गामक नजदीक कूदि गेलाह, आ खराब गाम आओर दूर छलनि, तखन हुनका नीक गामक लोक मानल गेलनि'। हमरा सब के कहलक अछि अबू अल अब्बास बिन अब्दुल्लाह बिन इस्माइल अल बगदादी, हमरा सब के कहलक अछि 'अफ्फान, हमरा सब के हम्मम के कहने अछि, ओ एहन किछु के जिक्र केलक अछि।