प्रतिनिधि हदीस
इमाम दरिमी : 505
أَخْبَرَنَا الْوَلِيدُ بْنُ شُجَاعٍ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ شُعَيْبِ بْنِ شَابُورٍ أَخْبَرَنَا الْوَلِيدُ بْنُ سُلَيْمَانَ بْنِ أَبِي السَّائِبِ عَنْ رَجَاءِ بْنِ حَيْوَةَ أَنَّهُ حَدَّثَهُ قَالَ كَتَبَ هِشَامُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ إِلَى عَامِلِهِ أَنْ يَسْأَلَنِي عَنْ حَدِيثٍ قَالَ رَجَاءٌ فَكُنْتُ قَدْ نَسِيتُهُ لَوْلَا أَنَّهُ كَانَ عِنْدِي مَكْتُوبًا
हमें बताया है [अल वालिद बिन स्यूजा'] उन्होंने कहा: हमें बताया है [मुहम्मद बिन स्यू'एब बिन स्याबुर] ने हमें बताया है [अल वालिद बिन सुलेमान बिन अबू अस सा'इब] [रजा` बिन हैवाह] से कि उन्होंने बताया: "हिस्याम बिन अब्दुल मलिक ने एक बार अपने कर्मचारी को एक हदीस के बारे में पूछने के लिए एक पत्र लिखा था, राजा` ने कहा: 'अगर मेरे पास लिखित रूप में एक प्रति नहीं होती तो मैं हदीस भूल जाता'"।