प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 6285
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصِ بْنِ غِيَاثٍ حَدَّثَنِي أَبِي حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَعَنَ اللَّهُ السَّارِقَ يَسْرِقُ الْبَيْضَةَ فَتُقْطَعُ يَدُهُ وَيَسْرِقُ الْحَبْلَ فَتُقْطَعُ يَدُهُقَالَ الْأَعْمَشُ كَانُوا يَرَوْنَ أَنَّهُ بَيْضُ الْحَدِيدِ وَالْحَبْلُ كَانُوا يَرَوْنَ أَنَّهُ مِنْهَا مَا يَسْوَى دَرَاهِمَ
हमें बताया गया है [उमर बिन हफ़्स बिन ग़ियात्स] ने मुझे [मेरे पिता] बताया है [अल अमाश] ने कहा; मैंने [अबू सालेह] को [अबू हुरैरा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना: "अल्लाह अंडे के चोर पर तब तक लानत करता है जब तक उसका हाथ कट न जाए, और अल्लाह रस्सी के चोर पर तब तक लानत करता है जब तक उसका हाथ कट न जाए।" अल अमाश ने कहा, साथियों की राय है कि यहां अंडे का मतलब लोहा है और रस्सी का मतलब है अगर वह कई दिरहम की हो।