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Tidak ada yang lebih zhalim daripada orang yang menciptakan seperti ciptaan Allah
Imam Muslim : 3947حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ وَأَبُو كُرَيْبٍ وَأَلْفَاظُهُمْ مُتَقَارِبَةٌ قَالُوا حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ عَنْ عُمَارَةَ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ قَالَ دَخَلْتُ مَعَ أَبِي هُرَيْرَةَ فِي دَارِ مَرْوَانَ فَرَأَى فِيهَا تَصَاوِيرَ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنْ ذَهَبَ يَخْلُقُ خَلْقًا كَخَلْقِي فَلْيَخْلُقُوا ذَرَّةً أَوْ لِيَخْلُقُوا حَبَّةً أَوْ لِيَخْلُقُوا شَعِيرَةً و حَدَّثَنِيهِ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ عُمَارَةَ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ قَالَ دَخَلْتُ أَنَا وَأَبُو هُرَيْرَةَ دَارًا تُبْنَى بِالْمَدِينَةِ لِسَعِيدٍ أَوْ لِمَرْوَانَ قَالَ فَرَأَى مُصَوِّرًا يُصَوِّرُ فِي الدَّارِ فَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِهِ وَلَمْ يَذْكُرْ أَوْ لِيَخْلُقُوا شَعِيرَةً
हमरा सभकेँ [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] आ [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] आ [अबू कुरैब]केँ अलग-अलग लफाज कहि कऽ ओ सभ कहलनि; हमरा सभ केँ [इब्न फुदैल] केँ [उमराह] सँ [अबू ज़ुराह] सँ कहने छथि ओ कहलनि; '[अबू हुरैरा] आ हम एक बेर मरवानक घर मे प्रवेश केने रही।' अबू हुरैरा घर मे कतेको चित्र देखलनि आ कहलनि; 'हम एक बेर रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने रही: 'अल्लाह सुभानाहु व ता'ला कहलनि: 'हमर प्राणी सन रचना बनेबाक प्रयास करय बला व्यक्ति सं बेसी अन्यायी आओर के अछि? देखू जे परमाणु बना सकैत छथि, वा अनाज बना सकैत छथि, वा जौ बना सकैत छथि' । आ हमरा [जुहैर बिन हरब] केँ कहि देने छथि; [उमारा] स [अबू ज़ुराह] स हमरा सब स [जरीर] क संबंध बना कए ओ कहलनि; हम आ [अबू हुरैरा] एक बेर मदीना शहरक एकटा घर मे घुसलहुँ जे सैद वा मरवानक छल | अबू ज़ुराह कहलनि; तखन अबू हुरैरा घर मे कतेको चित्र देखलनि। तखन ओ कहलनि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि - एहने हदीसक संग - मुदा लफाझ 'या जौ बनेबाक' जिक्र नहि केलनि |