प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 1810
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا بَدَلُ بْنُ الْمُحَبَّرِ أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ عَنْ الْعَلَاءِ ابْنَ أَخِي شُعَيْبٍ الرَّازِيِّ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ رَجُلٍ مِنْ بَنِي سُلَيْمٍ قَالَخَطَبْتُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمَامَةَ بِنْتَ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ فَأَنْكَحَنِي مِنْ غَيْرِ أَنْ يَتَشَهَّدَ
हमें [मुहम्मद बिन बसिस्यार] ने बताया है, हमें [बादल बिन अल मुहब्बर] ने बताया है, हमें [स्यूबा] ने [अल 'अला'] से बताया है जो स्यूएब अर रज़ी के बेटे [इस्माईल बिन इब्राहिम] के भाई [बनी सुलैमान के एक आदमी] से है, उसने कहा; मैंने उमामा बिन्त अब्दुल मुत्तलिब को रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने शादी का प्रस्ताव दिया, फिर उन्होंने बिना शहादत कहे मुझसे शादी कर ली।