प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 4989
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَمَا عَابَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ طَعَامًا قَطُّ إِنْ اشْتَهَاهُ أَكَلَهُ وَإِنْ كَرِهَهُ تَرَكَهُ
हमें बताया है [मुहम्मद बिन कसीर] हमें बताया है [सुफियान] [अल अमासी] से [अबू हाज़िम] से [अबू हुरैरा] से उन्होंने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी भी भोजन की आलोचना नहीं की। अगर वह इसे पसंद करता है, तो वह इसे खाता है और अगर वह इसे पसंद नहीं करता है, तो वह इसे छोड़ देता है।