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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम अहमद : 5459

حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يَصْبُغُ ثِيَابَهُ وَيَدَّهِنُ بِالزَّعْفَرَانِ فَقِيلَ لَهُ لِمَ تَصْبُغُ ثِيَابَكَ وَتَدَّهِنُ بِالزَّعْفَرَانِ قَالَ لِأَنِّي رَأَيْتُهُ أَحَبَّ الْأَصْبَاغِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَّهِنُ بِهِ وَيَصْبُغُ بِهِ ثِيَابَهُ

हमें [इसहाक बिन ईसा] ने [अब्दुल्ला बिन ज़ैद बिन असलम] को [अपने पिता], [इब्न उमर] से बताया है, एक बार उन्होंने अपने कपड़े रंगे और उन पर ज़फ़रान का तेल लगाया। उनसे पूछा गया, "आप अपने कपड़े क्यों रंगते हैं और उन पर ज़फ़रान का तेल क्यों लगाते हैं?" इब्न उमर ने जवाब दिया, "क्योंकि मैंने देखा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनसे सबसे ज़्यादा प्यार करते थे। वह अक्सर अपने कपड़ों पर ज़फ़रान का तेल लगाने और रंगने के लिए इसी तेल का इस्तेमाल करते थे।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 5459, 5823