Hadith Representative
Larangan untuk saling hasad
Imam Abu Dawud : 4264حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَبَاغَضُوا وَلَا تَحَاسَدُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَكُونُوا عِبَادَ اللَّهِ إِخْوَانًا وَلَا يَحِلُّ لِمُسْلِمٍ أَنْ يَهْجُرَ أَخَاهُ فَوْقَ ثَلَاثِ لَيَالٍ
[अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] द्वारा [मालिक] स [इब्नु शिहाब] स [अनस बिन मलिक] स हमरा सब कए कहल गेल अछि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे एक-दोसर स क्रोध नहि करू, एक-दोसर स घृणा करू, आ एक-दोसर स पीठ फेरू। अल्लाह के भाईचारा सेवक बनें। आ मुसलमान के लेल ई हलाल नहिं जे - चुप्पी - अपन भाई सं तीन राति सं बेसी दूर रहय'.