हदीस
Wahai sekalian manusian, ucapkanlah, LAA ILAAHA ILLALLAH, niscaya kalian akan selamat
Imam Ahmad : 18234حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ أَبِي الْعَبَّاسِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ أَخْبَرَنِي رَجُلٌ يُقَالُ لَهُ رَبِيعَةُ بْنُ عَبَّادٍ مِنْ بَنِي الدِّيلِ وَكَانَ جَاهِلِيًّا قَالَ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ فِي سُوقِ ذِي الْمَجَازِ وَهُوَ يَقُولُ يَا أَيُّهَا النَّاسُ قُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ تُفْلِحُوا وَالنَّاسُ مُجْتَمِعُونَ عَلَيْهِ وَوَرَاءَهُ رَجُلٌ وَضِيءُ الْوَجْهِ أَحْوَلُ ذُو غَدِيرَتَيْنِ يَقُولُ إِنَّهُ صَابِئٌ كَاذِبٌ يَتْبَعُهُ حَيْثُ ذَهَبَ فَسَأَلْتُ عَنْهُ فَذَكَرُوا لِي نَسَبَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالُوا لِي هَذَا عَمُّهُ أَبُو لَهَبٍ حَدَّثَنَا سُرَيْجٌ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ عَبَّادٍ الدُّؤَلِيِّ وَكَانَ جَاهِلِيًّا فَأَسْلَمَ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ قَالَ فَقُلْتُ مَنْ هَذَا قَالَ هَذَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ وَهُوَ يَذْكُرُ النُّبُوَّةَ قُلْتُ مَنْ هَذَا الَّذِي يُكَذِّبُهُ قَالُوا هَذَا عَمُّهُ أَبُو لَهَبٍ قَالَ أَبُو الزِّنَادِ فَقُلْتُ لِرَبِيعَةَ بْنِ عَبَّادٍ إِنَّكَ يَوْمَئِذٍ كُنْتَ صَغِيرًا قَالَ لَا وَاللَّهِ إِنِّي يَوْمَئِذٍ لَأَعْقِلُ أَنِّي لَأَزْفِرُ الْقِرْبَةَ يَعْنِي أَحْمِلُهَا
हमनी के बतवले बाड़े [इब्राहिम बिन अबुल अब्बास] हमनी के [अब्दुररहमान बिन अबूज जिनाद] [अपना पिता] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े, हमरा के एगो अयीसन आदमी के बारे में बतवले बाड़े, जेकरा के आमतौर प बानी अद दिल से [रबियाह बिन अब्बाद] कहल जाला अवुरी उ एगो अयीसन आदमी हवे, जेकरा अज्ञानता के दौर के अनुभव भईल बा, उ कहले; जब हम अभी जहिलिया में रहनी त एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़ुल मजाज बाजार में देखले रहनी। ओह घरी ऊ कहले कि हे लोग कहऽ कि ला इलाहा इल्लाह, रउरा सभे के उद्धार जरूर होई’। त लोग ओकरा चारो ओर जमा हो गइल जबकि ओकरा पीछे एगो आदमी रहे जेकर चेहरा सुन्दर रहे, आँख चकनाचूर रहे आ बाल दू भाग में लटकल रहे। ऊ आदमी कहलस कि ऊ धर्मत्यागी ह - ऊ अपना पुरखन के धर्म छोड़ दिहलसि - आ झूठा ह’. ऊ आदमी हमेशा ओकरा पीछे-पीछे जहाँ-जहाँ जात रहे। त हम पूछनी कि उ आदमी के ह, त उ लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संदेश के पालन करत कहले कि इ आदमी उनुकर चाचा हवे, यानी अबू लाहब। हमनी के [सूरैज] बतावल गइल बा कि हमनी के [इब्नु अबू जिनाद] के [उनकर पिता] से [रबीअह बिन अब्बाद अद दु`अली] से बतावल गइल बा कि ऊ एगो अइसन व्यक्ति रहले जे अज्ञानता के दौर के अनुभव कइले रहले आ ओकरा बाद इस्लाम अपना लिहले रहले. ऊ कहले कि; हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के देखले रहनी, फिर उ हदीस के भी जिक्र कईले रहले। रबियाह कहले कि; हम पूछनी कि ई के ह? उ जवाब देले कि, 'उ मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन अब्दुल मुत्तालिब हवे'। उ भविष्यवक्ता के भी जिक्र कईले। फेर हम फेर पूछनी कि ई के ह जवन हमेशा एकरा से इनकार करेला? उ लोग जवाब देले, 'ई आदमी ओकर चाचा हवे, यानी अबू लाहब'। अबू जिनाद कहले कि; हम रबियाह बिन अब्बाद से कहनी, 'वास्तव में ओह दिन तू अभी छोट रहलू'। उ जवाब देले कि ना, अल्लाह के कसम। ओह दिन हम यौवन में पहुँच गइनी। हम असल में किरबाह -पानी भंडारण खातिर चमड़ा के थैली-' लेके चले में सफल भइल बानी।