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Hibah tidak boleh ditarik kembali kecuali oleh orang tua kepada anaknya
Imam Tirmidzi : 1220قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عُمَرَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ لَا يَحِلُّ لِأَحَدٍ أَنْ يُعْطِيَ عَطِيَّةً فَيَرْجِعَ فِيهَا إِلَّا الْوَالِدَ فِيمَا يُعْطِي وَلَدَهُحَدَّثَنَا بِذَلِكَ مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ أَنَّهُ سَمِعَ طَاوُسًا يُحَدِّثُ عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَابْنِ عَبَّاسٍ يَرْفَعَانِ الْحَدِيثَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا الْحَدِيثِ عِنْدَ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَيْرِهِمْ قَالُوا مَنْ وَهَبَ هِبَةً لِذِي رَحِمٍ مَحْرَمٍ فَلَيْسَ لَهُ أَنْ يَرْجِعَ فِيهَا وَمَنْ وَهَبَ هِبَةً لِغَيْرِ ذِي رَحِمٍ مَحْرَمٍ فَلَهُ أَنْ يَرْجِعَ فِيهَا مَا لَمْ يُثَبْ مِنْهَا وَهُوَ قَوْلُ الثَّوْرِيِّ و قَالَ الشَّافِعِيُّ لَا يَحِلُّ لِأَحَدٍ أَنْ يُعْطِيَ عَطِيَّةً فَيَرْجِعَ فِيهَا إِلَّا الْوَالِدَ فِيمَا يُعْطِي وَلَدَهُ وَاحْتَجَّ الشَّافِعِيُّ بِحَدِيثِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَحِلُّ لِأَحَدٍ أَنْ يُعْطِيَ عَطِيَّةً فَيَرْجِعَ فِيهَا إِلَّا الْوَالِدَ فِيمَا يُعْطِي وَلَدَهُ
ओ कहलनि; एहि मामला मे [इब्न उमर] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स सेहो एहने हदीस अछि जे ओ कहने छलाह: 'कोनो उपहार देब आ फेर ओकरा वापस ल' लेब हलाल नहि अछि, सिवाय ओहि माता-पिताक जे अपन बच्चा केँ देने छथि'। हमरा सब के एकर बारे में बतौने छथि [मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमरा सब के [इब्न अबू अदी] के [हुसैन अल मुअल्लीम] स [अमर बिन स्यूअलिम] स कहने छथि जे ओ [थाउस] के [इब्न उमर] स एकटा हदीस पहुंचबैत सुनने छलाह आ [इब्न अब्बास] दुनु गोटे एहि हदीस के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स सुनौलनि। अबू ईसा कहलनि; इब्न अब्बास केरऽ हदीस अल्लाह रवियत रहै, हसन केरऽ सच्चे हदीस छै आरू ई हदीस नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ साथी आरू ओकरा सिनी के अलावा अन्य विद्वानऽ के अनुसार दान-पुण्य केरऽ दिशा-निर्देश छै । बहस करैत छथि; जे कियो अपन परिजन केँ किछु दैत छैक, ओकरा वापस लेबाक कोनो अधिकार नहि छैक, मुदा जे कियो अपन रिश्तेदारक अतिरिक्त ककरो किछु देत से वापस ल' सकैत छैक, मुदा ओकर उपहारक इनाम नहि भेटतैक। ई अतस त्साउरी के विचार छै जबकि असी स्याफी'ई के विचार छै; कियो किछु द क फेर वापस ल लेब हलाल नहि अछि सिवाय माता-पिता के जे अपन बच्चा के देल गेल अछि ओकर संबंध मे। ऐश स्याफी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स अब्दुल्लाह बिन उमर के हदीस के विरोध केलनि, ओ कहलनि जे, 'ई हलाल नहि अछि जे कियो किछु द क फेर ओकरा वापस ल' लेत, सिवाय माता-पिता के - जे अपन बच्चा के देल गेल चीज वापस ल लैत छथि'।