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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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हदीस खोज परिणाम :
कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 2420

حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ النَّمَرِيُّ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ فَيْرُوزَ قَالَسَأَلْتُ الْبَرَاءَ بْنَ عَازِبٍ مَا لَا يَجُوزُ فِي الْأَضَاحِيِّ فَقَالَ قَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَصَابِعِي أَقْصَرُ مِنْ أَصَابِعِهِ وَأَنَامِلِي أَقْصَرُ مِنْ أَنَامِلِهِ فَقَالَ أَرْبَعٌ لَا تَجُوزُ فِي الْأَضَاحِيِّ فَقَالَ الْعَوْرَاءُ بَيِّنٌ عَوَرُهَا وَالْمَرِيضَةُ بَيِّنٌ مَرَضُهَا وَالْعَرْجَاءُ بَيِّنٌ ظَلْعُهَا وَالْكَسِيرُ الَّتِي لَا تَنْقَى قَالَ قُلْتُ فَإِنِّي أَكْرَهُ أَنْ يَكُونَ فِي السِّنِّ نَقْصٌ قَالَ مَا كَرِهْتَ فَدَعْهُ وَلَا تُحَرِّمْهُ عَلَى أَحَدٍقَالَ أَبُو دَاوُد لَيْسَ لَهَا مُخٌّ

हफ़्श बिन उमर अन नामरी ने हमें बताया है, सुलेमान बिन अब्दुर्रहमान से हमें बताया है, उबैद बिन फ़ैरुज़ से कहा है; मैंने एक बार बरा बिन अज़ीब से पूछा; कुर्बानी के जानवरों में क्या चीज़ जायज़ नहीं है? तो उन्होंने कहा; रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार हमारे बीच खड़े हुए, मेरी उंगलियाँ उनकी उंगलियाँ से छोटी थीं और मेरी उंगलियाँ उनकी उंगलियाँ से छोटी थीं, फिर उन्होंने कहा: "चार चीज़ें जो कुर्बानी के जानवरों में नहीं होनी चाहिए।" फिर उन्होंने कहा; यानी; एक आँख से अंधा जो साफ़ तौर पर अंधा है, लंगड़ा जो साफ़ तौर पर लंगड़ा रहा है, बीमार जो साफ़ तौर पर दर्द में है, और एक टूटा हुआ पैर जिसमें कोई मस्सों की हड्डी नहीं है। उबैद ने कहा; मैंने बरा से कहा; उसे यह पसंद नहीं है कि उसके दाँतों में कोई खराबी हो। उसने कहा; जो तुम्हें पसंद नहीं है उसे छोड़ दो और किसी को मना मत करो। अबू दाउद ने कहा; उसमें कोई दिमाग नहीं है।

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 17777, 17809, 17919
इमाम अबू दाऊद : 2420
इमाम नसाई : 4293, 4294, 4297, 4299
इमाम इब्नु माजा : 3135
इमाम दरिमी : 1867, 1868