प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1299
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي مَرْيَمَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ قَالَ أَخْبَرَنِي هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَاأَنَّ رَجُلًا قَالَ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أُمِّي افْتُلِتَتْ نَفْسُهَا وَأَظُنُّهَا لَوْ تَكَلَّمَتْ تَصَدَّقَتْ فَهَلْ لَهَا أَجْرٌ إِنْ تَصَدَّقْتُ عَنْهَا قَالَ نَعَمْ
हमें बताया है [सईद बिन अबू मरियम] ने हमें बताया है [मुहम्मद बिन जाफर] ने कहा, मुझे [हिसाम बिन 'उरवाह] ने [अपने पिता] से ['ऐस्या रदलिल्लाहु अन्हा] से बताया है कि एक आदमी था जिसने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा: "मेरी माँ की अचानक मृत्यु हो गई, और मुझे शक है कि अगर उसने बात की होती तो वह सदका करती। क्या उसे पुरस्कृत किया जाता अगर मैं उसके लिए (उसकी ओर से) शदका देता?"। उसने उत्तर दिया: "हाँ, यह सही है।"