प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1332
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ قَالَ رَجُلٌ لَأَتَصَدَّقَنَّ بِصَدَقَةٍ فَخَرَجَ بِصَدَقَتِهِ فَوَضَعَهَا فِي يَدِ سَارِقٍ فَأَصْبَحُوا يَتَحَدَّثُونَ تُصُدِّقَ عَلَى سَارِقٍ فَقَالَ اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ لَأَتَصَدَّقَنَّ بِصَدَقَةٍ فَخَرَجَ بِصَدَقَتِهِ فَوَضَعَهَا فِي يَدَيْ زَانِيَةٍ فَأَصْبَحُوا يَتَحَدَّثُونَ تُصُدِّقَ اللَّيْلَةَ عَلَى زَانِيَةٍ فَقَالَ اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ عَلَى زَانِيَةٍ لَأَتَصَدَّقَنَّ بِصَدَقَةٍ فَخَرَجَ بِصَدَقَتِهِ فَوَضَعَهَا فِي يَدَيْ غَنِيٍّ فَأَصْبَحُوا يَتَحَدَّثُونَ تُصُدِّقَ عَلَى غَنِيٍّ فَقَالَ اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ عَلَى سَارِقٍ وَعَلَى زَانِيَةٍ وَعَلَى غَنِيٍّ فَأُتِيَ فَقِيلَ لَهُ أَمَّا صَدَقَتُكَ عَلَى سَارِقٍ فَلَعَلَّهُ أَنْ يَسْتَعِفَّ عَنْ سَرِقَتِهِ وَأَمَّا الزَّانِيَةُ فَلَعَلَّهَا أَنْ تَسْتَعِفَّ عَنْ زِنَاهَا وَأَمَّا الْغَنِيُّ فَلَعَلَّهُ يَعْتَبِرُ فَيُنْفِقُ مِمَّا أَعْطَاهُ اللَّهُ
हमें बताया है [अबू अल यमन] ने हमें बताया है [स्यूऐब] ने हमें बताया है [अबू अज़ ज़नद] ने [अल अराज] से [अबू हुरैरा रदलिअल्लाहु अन्हु] से; रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "एक आदमी था जिसने कहा: मैं ज़रूर सदक़ा दूँगा। फिर वह अपना सदक़ा लेकर बाहर आया और पता चला कि वह एक चोर के हाथ लग गया। अगली सुबह लोग इस बारे में बात कर रहे थे कि उसने अपना सदक़ा एक चोर को दे दिया। यह सुनकर उस आदमी ने कहा, "हे अल्लाह, तेरी तारीफ़ हो, मैं ज़रूर फिर से सदक़ा दूँगा।" फिर वह अपना सदक़ा लेकर बाहर आया और पता चला कि वह एक बदकार के हाथ लग गया। अगली सुबह लोग इस बारे में बात कर रहे थे कि कैसे पिछली रात उसने अपना सदक़ा एक बदकार को दे दिया। फिर उस आदमी ने फिर कहा: हे अल्लाह, तेरी तारीफ़ हो, (पता चला मेरा सदक़ा एक बदकार को पड़ गया), मैं ज़रूर उसका सदक़ा दूँगा फिर कहा: हे अल्लाह, तेरी तारीफ़ हो, (पता चला मेरा सदक़ा एक चोर, एक बदकार और एक अमीर आदमी को पड़ गया)। उसके बाद, उस आदमी को एक सपना आया और उससे कहा गया: "जहाँ तक तुम्हारी बात है चोर को शदका देने से उम्मीद है कि चोर अपने कामों से बच जाएगा, जबकि व्यभिचारी को शदका देने से उम्मीद है कि वह दोबारा व्यभिचार करने से बच जाएगा और अमीर आदमी को शदका देने से उम्मीद है कि उसे सबक मिलेगा ताकि वह अल्लाह की दी हुई दौलत खर्च कर सके।