प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1781
حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَتَقَدَّمَنَّ أَحَدُكُمْ رَمَضَانَ بِصَوْمِ يَوْمٍ أَوْ يَوْمَيْنِ إِلَّا أَنْ يَكُونَ رَجُلٌ كَانَ يَصُومُ صَوْمَهُ فَلْيَصُمْ ذَلِكَ الْيَوْمَ
हमें बताया गया है [मुस्लिम बिन इब्राहीम] ने हमें बताया है [हिसाम] ने हमें बताया है [याह्या बिन अबू कसीर] [अबू सलमा] से [अबू हुरैरा रदियल्लाहु अन्हु] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "तुम में से कोई भी रमज़ान के महीने से पहले एक या दो दिन का उपवास न करे जब तक कि कोई व्यक्ति उपवास (सुन्नत) का आदी न हो तो उस दिन उसे ऐसा करने की अनुमति है।"