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Malam pertengahan Sya’ban: shalat malamnya dan berpuasa siangnya
Imam Tirmidzi : 669حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا بَقِيَ نِصْفٌ مِنْ شَعْبَانَ فَلَا تَصُومُواقَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ لَا نَعْرِفُهُ إِلَّا مِنْ هَذَا الْوَجْهِ عَلَى هَذَا اللَّفْظِ وَمَعْنَى هَذَا الْحَدِيثِ عِنْدَ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنْ يَكُونَ الرَّجُلُ مُفْطِرًا فَإِذَا بَقِيَ مِنْ شَعْبَانَ شَيْءٌ أَخَذَ فِي الصَّوْمِ لِحَالِ شَهْرِ رَمَضَانَ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا يُشْبِهُ قَوْلَهُمْ حَيْثُ قَالَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَقَدَّمُوا شَهْرَ رَمَضَانَ بِصِيَامٍ إِلَّا أَنْ يُوَافِقَ ذَلِكَ صَوْمًا كَانَ يَصُومُهُ أَحَدُكُمْ وَقَدْ دَلَّ فِي هَذَا الْحَدِيثِ أَنَّمَا الْكَرَاهِيَةُ عَلَى مَنْ يَتَعَمَّدُ الصِّيَامَ لِحَالِ رَمَضَانَ
कुतैबाह हमरा सब के अबू हुरैरा स अल-अला बिन अब्दुररहमान स बतौलनि, जे कहलनि: अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: "जखन शाबान के मध्य आबि जायत तखन रोजा नहि करू।" अबू ईसा कहलकै: "अबू हुरैरा के हदीस हसन सहीह हदीस छै, ऊपर के तरह शब्दावली के साथ ई मार्ग के अलावा हमरा सब के पता नै छै।" किछु विद्वानक अनुसार उपरोक्त हदीसक अर्थ ई अछि जे जँ कोनो व्यक्ति केँ रोजा रखबाक आदति नहि छैक तखन जखन शा'बान केर मध्य आबि जाइत छैक तखन ओ रोजा शुरू क' दैत छैक कारण ओ रमजान मासक स्वागत क' रहल छैक | नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स अबू हुरैरा स रिवायत अछि जे हुनका सब द्वारा व्याख्या कयल गेल अर्थ के रूप मे कहल गेल अछि, अर्थात जे ओ सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम कहलनि जे रमजान महीना स पहिने किछु दिन तक रोजा नहि राखू जाबत तक ओ अहाँक सामान्य रोजा के दिन स मेल नहि खाइत अछि। ई हदीस रमजान के रोजा आबै स॑ पहल॑ जानबूझ क॑ रोजा रखै वाला लोगऽ लेली मनाही क॑ दर्शाबै छै ।