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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



- Puasa Ramadhan dan Puasa Sunnah Larangan-larangan Puasa Kafarat berhubungan pada saat puasa adalah membebaskan satu budak, berpuasa 2 bulan berturut-turut dan memberikan nafkah 60 fakir miskin

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Kafarat berhubungan pada saat puasa adalah membebaskan satu budak, berpuasa 2 bulan berturut-turut dan memberikan nafkah 60 fakir miskin
Imam Tirmidzi : 656

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ وَأَبَو عَمَّارٍ وَالْمَعْنَى وَاحِدٌ وَاللَّفْظُ لَفْظُ أَبِي عَمَّارٍ قَالَا أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَأَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلَكْتُ قَالَ وَمَا أَهْلَكَكَ قَالَ وَقَعْتُ عَلَى امْرَأَتِي فِي رَمَضَانَ قَالَ هَلْ تَسْتَطِيعُ أَنْ تُعْتِقَ رَقَبَةً قَالَ لَا قَالَ فَهَلْ تَسْتَطِيعُ أَنْ تَصُومَ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ قَالَ لَا قَالَ فَهَلْ تَسْتَطِيعُ أَنْ تُطْعِمَ سِتِّينَ مِسْكِينًا قَالَ لَا قَالَ اجْلِسْ فَجَلَسَ فَأُتِيَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِعَرَقٍ فِيهِ تَمْرٌ وَالْعَرَقُ الْمِكْتَلُ الضَّخْمُ قَالَ تَصَدَّقْ بِهِ فَقَالَ مَا بَيْنَ لَابَتَيْهَا أَحَدٌ أَفْقَرَ مِنَّا قَالَ فَضَحِكَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى بَدَتْ أَنْيَابُهُ قَالَ فَخُذْهُ فَأَطْعِمْهُ أَهْلَكَقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَعَائِشَةَ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا الْحَدِيثِ عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ فِي مَنْ أَفْطَرَ فِي رَمَضَانَ مُتَعَمِّدًا مِنْ جِمَاعٍ وَأَمَّا مَنْ أَفْطَرَ مُتَعَمِّدًا مِنْ أَكْلٍ أَوْ شُرْبٍ فَإِنَّ أَهْلَ الْعِلْمِ قَدْ اخْتَلَفُوا فِي ذَلِكَ فَقَالَ بَعْضُهُمْ عَلَيْهِ الْقَضَاءُ وَالْكَفَّارَةُ وَشَبَّهُوا الْأَكْلَ وَالشُّرْبَ بِالْجِمَاعِ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَإِسْحَقَ و قَالَ بَعْضُهُمْ عَلَيْهِ الْقَضَاءُ وَلَا كَفَّارَةَ عَلَيْهِ لِأَنَّهُ إِنَّمَا ذُكِرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْكَفَّارَةُ فِي الْجِمَاعِ وَلَمْ تُذْكَرْ عَنْهُ فِي الْأَكْلِ وَالشُّرْبِ وَقَالُوا لَا يُشْبِهُ الْأَكْلُ وَالشُّرْبُ الْجِمَاعَ وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ و قَالَ الشَّافِعِيُّ وَقَوْلُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِلرَّجُلِ الَّذِي أَفْطَرَ فَتَصَدَّقَ عَلَيْهِ خُذْهُ فَأَطْعِمْهُ أَهْلَكَ يَحْتَمِلُ هَذَا مَعَانِيَ يَحْتَمِلُ أَنْ تَكُونَ الْكَفَّارَةُ عَلَى مَنْ قَدَرَ عَلَيْهَا وَهَذَا رَجُلٌ لَمْ يَقْدِرْ عَلَى الْكَفَّارَةِ فَلَمَّا أَعْطَاهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا وَمَلَكَهُ فَقَالَ الرَّجُلُ مَا أَحَدٌ أَفْقَرَ إِلَيْهِ مِنَّا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خُذْهُ فَأَطْعِمْهُ أَهْلَكَ لِأَنَّ الْكَفَّارَةَ إِنَّمَا تَكُونُ بَعْدَ الْفَضْلِ عَنْ قُوتِهِ وَاخْتَارَ الشَّافِعِيُّ لِمَنْ كَانَ عَلَى مِثْلِ هَذَا الْحَالِ أَنْ يَأْكُلَهُ وَتَكُونَ الْكَفَّارَةُ عَلَيْهِ دَيْنًا فَمَتَى مَا مَلَكَ يَوْمًا مَا كَفَّرَ

हमरा सब के [नशर बिन अली अल जहदलामी] आ [अबू अम्मार] के कहलक अछि - हदीस के मतलब एके अछि जखन कि हदीस के उच्चारण अबू अम्मर स अछि - दुनू गोटे कहलनि, हमरा सब के [सुफयान बिन उयैनह] के [आज जुहरी] स [हुमैद बिन अब्दुररहमान] स [अबू हुरैराह] स कहलक अछि, एकटा आदमी नबी के पास आयल छल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ कहलक जे हे रसुलुल्लाह, हमरा लेल हाय। ओ पुछलनि: 'अहाँ केँ कोन चीजक नुकसान भेल?' ओ उत्तर देलनि, हम रमजान मासक दुपहर मे अपन पत्नीक संग सेक्स केने रही, ओ कहलनि: 'की अहाँ कोनो गुलाम केँ मुक्त करबा मे सक्षम छी?' ओ उत्तर देलनि, नहि। ओ कहलनि: 'की अहाँ लगातार दू मास धरि व्रत राखि सकैत छी?' ओ उत्तर देलनि, नहि। ओ आगू बजलाह: 'की अहाँ साठिटा गरीब लोकक पेट भरबा मे सक्षम छी?' ओ उत्तर देलनि, नहि। ओ कहलनि: 'बैसू'। तखन ओ बैसि गेलाह, तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम केँ खजूरक बोरा आनल गेलनि, तखन ओ कहलनि: 'हुनका सभ केँ दान करू'। ओ कहलनि, मदीना मे हमरा सभ सँ बेसी गरीब कियो नहि अछि। तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम ताबत धरि हँसैत रहलाह जाबत धरि हुनकर दाढ़ नहि देखाइत छलनि | ओ बजलाह - ल' क' अपन परिवार केँ द' दियौक'। -कथाकार- कहलनि, एहि अध्याय 9 मे इब्न उमर, 'ऐस्याह आ अब्दुल्लाह बिन अमरू सँ एकटा -पेन्ट- इतिहास सेहो अछि | अबू ईसा कहलकै, अबू हुरैरा के हदीस हसन के प्रामाणिक हदीस छै। विद्वान लोकनि एहि हदीस मे निहित कानून केर पालन करैत छथि, अर्थात् रमजान मास मे दिन मे अपन पत्नीक संग सेक्स कए जानि-बुझि कए रोजा तोड़निहार व्यक्ति । मुदा, जानि-बुझि कए खाइत-पीबैत व्रत तोड़निहार लोकक संबंध मे विद्वान लोकनिक भिन्न-भिन्न विचार अछि । एहि मे सँ किछु गोटे जेना सुफियन अतस त्सौरी, अब्दुल्लाह बिन अल मुबारक आ इसहाक केर मत छनि जे जे लोक जानि-बुझि क' खाइत-पीबि क' रोजा तोड़ैत छथि हुनका कदला' बना क' कफ्रा' देब' पड़ैत छनि - जुर्माना - - ओ सभ खान-पान केँ जिमा'क बराबरी मे दैत छथि - एम्हर किछु विद्वान जेना स्याफी'ई आ अहमद केर मत छनि जे - लोक जे... जानि-बुझि कए खा-पी कए रोजा तोड़ैत छथि - केवल कदला बनेबा लेल बाध्य होइत छथि आ कफ्राह देबा लेल बाध्य नहि छथि, कारण जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम कहला अछि जे कफ्राह कए सीमित करब अछि ओ केवल जिमा लेल अछि आ खाए-पीए क जिक्र नहि केने छथि। एम्हर खान-पान आ जिमा' एके नहि। इमाम स्याफी नँ कहलकै, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम केरऽ भिक्षा दै के हुक्म स॑ ई संभावना स॑ इंकार नै करलऽ जाय छै कि कफ्रा खाली वू लोगऽ लेली फर्ज छै जेकरऽ सामर्थ्य छै, कैन्हेंकि ई आदमी कफ्राह दै के सामर्थ्य नै रखै छै । तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम हुनका खजूर के थैली दऽ देलखिन आ कहलखिन जे दक्षिणा दियौन। लेकिन, हुनकऽ ई बयान के बाद कि हुनका स॑ जादा फकीर कोय नै छै, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम न॑ हुनका कहलकै कि अपनऽ परिवार केरऽ पेट भरना, कैन्हेंकि जरूरत केरऽ बचे वाला मुख्य भोजन स॑ कफ्रा केरऽ भुगतान करलऽ जाय छेलै । इमाम स्याफी ई पसंद करै छै कि जे लोगऽ के हालत ई आदमी के समान छै, खजूर खाय, लेकिन ओकरा पर तभियो कफ्राह -जुर्माना- चुकाबै के कर्ज छै, अगर वू नै करी सकै छै, त॑ ओकरा कफ्फरह -जुर्माना- देना बाध्य नै छै ।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 6650, 6989, 7367, 7453, 10269, 10270, 15825
Imam Bukhari : 1800, 1801, 4949, 5623, 5698, 6215, 6216, 6217, 6322
Imam Muslim : 1870, 1871, 1872, 1873, 1874
Imam Abu Dawud : 2042, 2043
Imam Tirmidzi : 656, 1121
Imam Ibnu Majah : 1661
Imam Malik : 583
Imam Darimi : 1654