Hadith Representative
Mempelajari iman sebelum mempelajari Al-Qur’an
Imam Ibnu Majah : 60حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ نَجِيحٍ وَكَانَ ثِقَةً عَنْ أَبِي عِمْرَانَ الْجَوْنِيِّ عَنْ جُنْدُبِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ فِتْيَانٌ حَزَاوِرَةٌ فَتَعَلَّمْنَا الْإِيمَانَ قَبْلَ أَنْ نَتَعَلَّمَ الْقُرْآنَ ثُمَّ تَعَلَّمْنَا الْقُرْآنَ فَازْدَدْنَا بِهِ إِيمَانًا
हमरा सब के कहलक अछि [अली बिन मुहम्मद] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [वाकी'] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [हम्मद बिन नजीह] -ओ त्सिकाह -भरोसा- - [अबू इमरान अल जौनी] स [जुंदुब बिन अब्दुल्लाह] स कहलक; 'जखन हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग छलहुं तखन ओहि समय हम सब मजबूत युवक छलहुं। हम कुरान के अध्ययन स पहिने आस्था के अध्ययन केलहुं, फेर कुरान के अध्ययन केलहुं, ताहि लेल हमर आस्था बढ़ल'।