हदीस
Rasulullah marah: Jangan berdebat pada masalah takdir
Imam Tirmidzi : 2059حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاوِيَةَ الْجُمَحِيُّ الْبَصْرِيُّ حَدَّثَنَا صَالِحٌ الْمُرِّيُّ عَنْ هِشَامِ بْنِ حَسَّانَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَخَرَجَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ نَتَنَازَعُ فِي الْقَدَرِ فَغَضِبَ حَتَّى احْمَرَّ وَجْهُهُ حَتَّى كَأَنَّمَا فُقِئَ فِي وَجْنَتَيْهِ الرُّمَّانُ فَقَالَ أَبِهَذَا أُمِرْتُمْ أَمْ بِهَذَا أُرْسِلْتُ إِلَيْكُمْ إِنَّمَا هَلَكَ مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ حِينَ تَنَازَعُوا فِي هَذَا الْأَمْرِ عَزَمْتُ عَلَيْكُمْ أَلَّا تَتَنَازَعُوا فِيهِقَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ عُمَرَ وَعَائِشَةَ وَأَنَسٍ وَهَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لَا نَعْرِفُهُ إِلَّا مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مِنْ حَدِيثِ صَالِحٍ الْمُرِّيِّ وَصَالِحٌ الْمُرِّيُّ لَهُ غَرَائِبُ يَنْفَرِدُ بِهَا لَا يُتَابَعُ عَلَيْهَا
हमनी के बतवले बाड़े ['अब्दुल्लाह बिन मुअवियाह अल जुमाही अल बशरी]; हमनी के [सालिह अल मुरी] के बतवले बाड़े; [हिस्याम बिन हसन] से [मुहम्मद बिन सिरीन] से [अबू हुरैरा] से उ कहले; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के किस्मत के लेके बहस करत घरी हमनी से मिले खातिर निकलले, फेर उ तब तक नाराज हो गईले जब तक कि उनुकर चेहरा लाल ना हो गईल जब तक कि उनुका गाल के काटल अनार निहन ना लउकल, फेर उ पूछले कि 'का रउआ के अयीसन आदेश दिहल गईल रहे कि हमरा के ए मामला खाती रउआ लगे भेजल गईल रहे? सचहूँ रउरा से पहिले के लोग के नाश एह मामिला में ओह लोग के विवाद का चलते भइल. एहसे हम रउरा से जोर देत बानी कि एह मुद्दा पर मतभेद मत होखीं'. अबू ईसा कहले कि; सार्थक हदीस उमर, ऐसिया आ अनस से भी रिवायत भइल बा। आ ई हदीस घरीब ह, सालीह अल मुर्री के हदीस से मिलल एह सनाद लाइन के छोड़ के हमनी के ना जानत बानी जा जबकि सालीह अल मुरी के लगे घरीब के एगो हदीस बा जवना के ऊ अकेले बतवले बाड़न आ केहू उनका पीछे ना चलल.