प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 4766
حَدَّثَنِي عُبَيْدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَاأَنَّهَا اسْتَعَارَتْ مِنْ أَسْمَاءَ قِلَادَةً فَهَلَكَتْ فَأَرْسَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَاسًا مِنْ أَصْحَابِهِ فِي طَلَبِهَا فَأَدْرَكَتْهُمْ الصَّلَاةُ فَصَلَّوْا بِغَيْرِ وُضُوءٍ فَلَمَّا أَتَوْا النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَكَوْا ذَلِكَ إِلَيْهِ فَنَزَلَتْ آيَةُ التَّيَمُّمِ فَقَالَ أُسَيْدُ بْنُ حُضَيْرٍ جَزَاكِ اللَّهُ خَيْرًا فَوَاللَّهِ مَا نَزَلَ بِكِ أَمْرٌ قَطُّ إِلَّا جَعَلَ اللَّهُ لَكِ مِنْهُ مَخْرَجًا وَجُعِلَ لِلْمُسْلِمِينَ فِيهِ بَرَكَةٌ
[उबैद बिन इस्माइल] ने मुझे [अबू उसामा] [हिशाम] से [अपने पिता] [आयशा] रदलिल्लाहु अन्हा से बताया कि एक बार उन्होंने अस्मा से एक हार उधार लिया था, फिर वह खो गया। तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने कुछ साथियों को हार ढूंढने के लिए भेजा। फिर नमाज़ का समय हुआ, तो उन्होंने पहले वुज़ू किए बिना नमाज़ पढ़ी। जब वे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आए, तो उन्होंने इसकी शिकायत की। तो तयम्मुम की आयत उतरी। इसलिए, उसैद बिन हुदलैर ने आयशा से कहा, "अल्लाह तुम्हें अच्छा बदला दे। अल्लाह की कसम, तुम्हें कोई तकलीफ़ नहीं है सिवाय इसके कि अल्लाह तुम्हारे लिए कोई रास्ता बना दे, और फिर मुसलमानों को उससे बरकत मिलती है।"