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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
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- Takdir Penciptaan makhluk Nama-nama penghuni surga dan neraka telah dicatat

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Nama-nama penghuni surga dan neraka telah dicatat
Imam Ahmad : 6275

حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ حَدَّثَنَا لَيْثٌ حَدَّثَنِي أَبُو قَبِيلٍ الْمَعَافِرِيُّ عَنْ شُفَيٍّ الْأَصْبَحِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ خَرَجَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَفِي يَدِهِ كِتَابَانِ فَقَالَ أَتَدْرُونَ مَا هَذَانِ الْكِتَابَانِ قَالَ قُلْنَا لَا إِلَّا أَنْ تُخْبِرَنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ لِلَّذِي فِي يَدِهِ الْيُمْنَى هَذَا كِتَابٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَمِينَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى بِأَسْمَاءِ أَهْلِ الْجَنَّةِ وَأَسْمَاءِ آبَائِهِمْ وَقَبَائِلِهِمْ ثُمَّ أُجْمِلَ عَلَى آخِرِهِمْ لَا يُزَادُ فِيهِمْ وَلَا يُنْقَصُ مِنْهُمْ أَبَدًا ثُمَّ قَالَ لِلَّذِي فِي يَسَارِهِ هَذَا كِتَابُ أَهْلِ النَّارِ بِأَسْمَائِهِمْ وَأَسْمَاءِ آبَائِهِمْ وَقَبَائِلِهِمْ ثُمَّ أُجْمِلَ عَلَى آخِرِهِمْ لَا يُزَادُ فِيهِمْ وَلَا يُنْقَصُ مِنْهُمْ أَبَدًا فَقَالَ أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلِأَيِّ شَيْءٍ إِذَنْ نَعْمَلُ إِنْ كَانَ هَذَا أَمْرًا قَدْ فُرِغَ مِنْهُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَدِّدُوا وَقَارِبُوا فَإِنَّ صَاحِبَ الْجَنَّةِ يُخْتَمُ لَهُ بِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ وَإِنْ عَمِلَ أَيَّ عَمَلٍ وَإِنَّ صَاحِبَ النَّارِ لَيُخْتَمُ لَهُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ وَإِنْ عَمِلَ أَيَّ عَمَلٍ ثُمَّ قَالَ بِيَدِهِ فَقَبَضَهَا ثُمَّ قَالَ فَرَغَ رَبُّكُمْ عَزَّ وَجَلَّ مِنْ الْعِبَادِ ثُمَّ قَالَ بِالْيُمْنَى فَنَبَذَ بِهَا فَقَالَ فَرِيقٌ فِي الْجَنَّةِ وَنَبَذَ بِالْيُسْرَى فَقَالَ فَرِيقٌ فِي السَّعِيرِ

हमरा सब के कहलक अछि [हसीम बिन कासिम] हमरा सब के कहलक अछि [लैट्स] हमरा सब के [अबू काबिल अल माअफीरी] स [सुफाई अल अशबाही] स [अब्दुल्लाह बिन अम्र] स रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलक अछि, ओ कहलनि: रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर हाथ में दू टा किताब ल क हमरा सब स भेंट करय लेल निकलल छलाह आ कहलनि: 'अहाँ केँ बुझल अछि जे ई दुनू पोथीक की सामग्री अछि?' ओ - अब्दुल्लाह - कहलनि : हम सब जवाब देलियनि, 'नहि, हमरा लोकनि केँ ता धरि नहि बुझल अछि जाबत धरि अहाँ एहि बारे मे नहि कहब, हे अल्लाह केर रसूलुल्लाह'। ओ अपन दहिना हाथक पोथीक संबंध मे कहलनि : 'ई लोकक रब्बक पोथी अछि जाहि मे स्वर्गक निवासीक नाम, ओकर पूर्वज आ ओकर जनजातिक नाम अछि, तखन आओर - ओ एकर उल्लेख मात्र सामान्यतः केलनि - हुनका सभ सँ किछु नहि जोड़ल जायत आ हुनका सभ सँ सदाक लेल किछु नहि छीनल जायत' | तखन बामा हाथ मे राखल पोथीक संबंध मे ओ कहलनि: 'ई नरकक निवासीक नामक सूची अछि, ओकर पूर्वज आ ओकर जनजातिक नामक सूची अछि, -तखन ओ हुनका लोकनिक सामान्य उल्लेख केलनि-, आ हुनका सभ मे सँ किछुओ सदाक लेल नहि जोड़ल जायत आ ने छीनल जायत'। तेँ संगी सभ बजलाह - जँ से अछि तँ नीक काज करबासँ की फायदा जँ पता चलल जे सभ किछु पहिनेसँ निर्धारित भ' गेल अछि ?' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, सोझ मार्ग चलू आ हुनका नजदीक आबि जाउ किएक त सचमुच स्वर्गवासी के अपन कर्म स्वर्ग के निवासी के कर्म स ढकल रहत भले ओ पहिने बहुत गलती केने छल। आ सचमुच नरक के कर्म के निवासी नरक के निवासी के कर्म स ढकल रहत भले ओ पहिने बहुत नीक काज केने छल' | तखन हाथ जोड़ि बजलाह: 'अहाँक रब्ब अपन नौकर सभक लेल सब किछु निर्धारित क' लेने छथि'। तखन ओ नोट दहिना हाथ मे फेकि बजलाह; 'किछु लोक एहन छथि जे स्वर्गक निवासी बनि जाइत छथि' । आ बामा हाथ मे नोट फेकि बजलाह: 'आ किछु गोटे नरकक निवासी बनि जेताह'।

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