Hadith Representative
Abu Hurairah selalu menghafal hadits pada majelis Rasulullah
Imam Muslim : 4547حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ جَمِيعًا عَنْ سُفْيَانَ قَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ الْأَعْرَجِ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُا إِنَّكُمْ تَزْعُمُونَ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ يُكْثِرُ الْحَدِيثَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاللَّهُ الْمَوْعِدُ كُنْتُ رَجُلًا مِسْكِينًا أَخْدُمُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى مِلْءِ بَطْنِي وَكَانَ الْمُهَاجِرُونَ يَشْغَلُهُمْ الصَّفْقُ بِالْأَسْوَاقِ وَكَانَتْ الْأَنْصَارُ يَشْغَلُهُمْ الْقِيَامُ عَلَى أَمْوَالِهِمْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يَبْسُطْ ثَوْبَهُ فَلَنْ يَنْسَى شَيْئًا سَمِعَهُ مِنِّي فَبَسَطْتُ ثَوْبِي حَتَّى قَضَى حَدِيثَهُ ثُمَّ ضَمَمْتُهُ إِلَيَّ فَمَا نَسِيتُ شَيْئًا سَمِعْتُهُ مِنْهُ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ جَعْفَرِ بْنِ يَحْيَى بْنِ خَالِدٍ أَخْبَرَنَا مَعْنٌ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ ح و حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ كِلَاهُمَا عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ بِهَذَا الْحَدِيثِ غَيْرَ أَنَّ مَالِكًا انْتَهَى حَدِيثُهُ عِنْدَ انْقِضَاءِ قَوْلِ أَبِي هُرَيْرَةَ وَلَمْ يَذْكُرْ فِي حَدِيثِهِ الرِّوَايَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يَبْسُطْ ثَوْبَهُ إِلَى آخِرِهِ
हमरा सब के [कुतैबा बिन सईद] आ [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] आ [जुहैर बिन हरब] के ई सब बात [सुफयान] स बता क ओ कहलनि; [जुहैर] हमरा सभकेँ [सुफयान बिन उयैनह] [अज ज़ुहरी] सँ [अल अ'राज] सँ बतेने छथि ओ कहलनि; हम [अबू हुरैरा] कहैत सुनलहुँ; 'अहाँ सोचैत छी जे अबू हुरैरा ओ व्यक्ति छथि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम सँ सबसँ बेसी हदीस बतौलनि, आ अल्लाह ओ छथि जे वादा पूरा करैत छथि।' हम पहिने एकटा गरीब व्यक्ति छलहुं जे सदिखन अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के मदद करैत छलहुं जे केवल बुनियादी भोजन खाइत छल, जखन कि मुहाजिरीन बाजार में कारोबार में व्यस्त रहैत छल, आ अंसार अपन संपत्ति में व्यस्त रहैत छल, तखन नबी (स.अ.व.) कहलनि: 'के अपन वस्त्र पसारि लेत आ हमरा सं जे सुनलनि से कहियो नहि बिसरत?' तेँ हम अपन वस्त्र ताबत धरि पसारि देलियैक जा धरि ओ अपन कहब समाप्त नहि क' देलक आ तखन हम अपन वस्त्र अपन देह पर लगा देलियैक। एकर बाद हम हुनका स जे हदीस सुनने छलहुं से कहियो नहि बिसरलहुं। हमरा ['अब्दुल्लाह बिन जा'फर बिन याह्या बिन खालिद] कहि देने छथि; हमरा सभकेँ [माआन] कहि देने अछि; हमरा सभकेँ [मलिक] कहने अछि; तहिना एकरा दोसर मार्ग सँ रिवायत कयल गेल अछि, आ हमरा सभ केँ ['आबाद बिन हुमैद] केँ कहि देने अछि; हमरा सभकेँ ['अब्दुर रज्जाक] कहने छथि; हमरा सब [मा'मर] के पूर्ण रूप स [अज ज़ुहरी] स [अल अ'राज] स [अबू हुरैरा] स एहि हदीस स जानकारी देलक अछि। ओना मलिक कहलनि जे ई हदीस मात्र अबू हुरैराक शब्द अछि । बिना पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स हदीस के जिक्र केने।