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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Nabi Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam Mukjizat Nabi Ifrit dari bangsa jin yang hendak mengganggu shalat rasulullah dan rencana untuk mengikatnya di masjid

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Ifrit dari bangsa jin yang hendak mengganggu shalat rasulullah dan rencana untuk mengikatnya di masjid
Imam Bukhari : 3170

حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ زِيَادٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ عِفْرِيتًا مِنْ الْجِنِّ تَفَلَّتَ الْبَارِحَةَ لِيَقْطَعَ عَلَيَّ صَلَاتِي فَأَمْكَنَنِي اللَّهُ مِنْهُ فَأَخَذْتُهُ فَأَرَدْتُ أَنْ أَرْبُطَهُ عَلَى سَارِيَةٍ مِنْ سَوَارِي الْمَسْجِدِ حَتَّى تَنْظُرُوا إِلَيْهِ كُلُّكُمْ فَذَكَرْتُ دَعْوَةَ أَخِي سُلَيْمَانَ رَبِّ{ هَبْ لِي مُلْكًا لَا يَنْبَغِي لِأَحَدٍ مِنْ بَعْدِي }فَرَدَدْتُهُ خَاسِئًا{ عِفْرِيتٌ }مُتَمَرِّدٌ مِنْ إِنْسٍ أَوْ جَانٍّ مِثْلُ زِبْنِيَةٍ جَمَاعَتُهَا الزَّبَانِيَةُ

हमरा के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन बस्यर] हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन जा'फर] हमनी के [स्यूबाह] से [मुहम्मद बिन जियाद] से [अबू हुरैरा रदलियाहु अनहु] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े: 'वास्तव में जिन्न से इफ्रीत बस हमरा के परेशान क देले बाड़े कि हम हमार नमाज तोड़ सकीले लेकिन अल्लाह हमरा के नमाज तोड़े में सक्षम बना देले बाड़े ओकरा के वश में कर लीं तब हम ओकरा के पकड़ लेनी आ ओकरा के मस्जिद के खंभा के बीच एगो खंभा से बान्हल चाहत रहनी जबले कि रउरा सभे में से हर केहू एकरा के ना देख पावे. बाकिर हमरा भाई पैगम्बर सुलेमान अलैहिस्सलम के दुआ याद आ गइल; -'हे प्रभु, हमरा के अइसन राज्य दीं जवन हमरा बाद केहु के ना होई'-। -क्यूएस के बा। शाद श्लोक 35- के बा। त हम ओह दानव के फेर से अपमानित हालत में छोड़ देनी। इफ्रीत शब्द - क्यूएस सूरह अन-नामल आयत 39 में - के प्रयोग ओह केहू खातिर कइल गइल बा जे आज्ञा ना मानेला - आज्ञा ना मानेला - इंसान आ जिन्न दुनु से। ‘इफ्रीत’ शब्द ‘जिबनियाह’ शब्द जइसन बा जवना के बहुवचन ‘जबनियाह’ बा. एही बीच 'इफ्रीत' 'अफारीत' के बहुवचन ह।

हदीस :


Imam Ahmad : 7628
Imam Bukhari : 441, 3170, 4434
Imam Muslim : 842