प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 3171
حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ حَدَّثَنَا مُغِيرَةُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ قَالَ سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ لَأَطُوفَنَّ اللَّيْلَةَ عَلَى سَبْعِينَ امْرَأَةً تَحْمِلُ كُلُّ امْرَأَةٍ فَارِسًا يُجَاهِدُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَقَالَ لَهُ صَاحِبُهُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ فَلَمْ يَقُلْ وَلَمْ تَحْمِلْ شَيْئًا إِلَّا وَاحِدًا سَاقِطًا أَحَدُ شِقَّيْهِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَوْ قَالَهَا لَجَاهَدُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِقَالَ شُعَيْبٌ وَابْنُ أَبِي الزِّنَادِ تِسْعِينَ وَهُوَ أَصَحُّ
हमें [खालिद बिन मखलाद] ने हमें [मुगीरा बिन अब्दुर रहमान] ने [अबू अज़ ज़नद] से [अल अरज] से [अबू हुरैरा रदियल्लाहु अन्हु] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया है: "पैगंबर सुलेमान बिन दाउद अलैहिमस ने अभिवादन किया; "एक रात मैं अपनी सत्तर पत्नियों को घुमाऊंगा (जिमा), जिनमें से प्रत्येक मेरी पत्नी गर्भवती होगी (और एक घुड़सवार को जन्म देगी) जो अल्लाह के मार्ग में लड़ेगा।" तब उसके दोस्त ने उससे कहा; "इंशा अल्लाह कहो (अगर अल्लाह चाहे")। लेकिन पैगंबर सुलेमान ने इंशा अल्लाह नहीं कहा, इसलिए उनकी पत्नियों में से कोई भी गर्भवती नहीं हुई, सिवाय एक व्यक्ति के जिसने बाद में एक बच्चे को जन्म दिया जिसके स्तन का एक तरफ (उसके शरीर का एक तरफ) गायब था। तब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अगर उसने इंशा-अल्लाह कहा होता तो उसके बच्चे गर्भवती हो जाते। अल्लाह के रास्ते में लड़ो।" [स्यूऐब] और [अबू अज़ ज़नाद] ने कहा; "सच तो यह है कि उसकी पत्नियाँ सत्तर थीं।"