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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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प्रतिनिधि हदीस
इमाम अहमद : 20288

حَدَّثَنَا عَبْد اللَّهِ حَدَّثَنَا هُدْبَةُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ عُتَيٍّ قَالَ رَأَيْتُ شَيْخًا بِالْمَدِينَةِ يَتَكَلَّمُ فَسَأَلْتُ عَنْهُ فَقَالُوا هَذَا أُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ فَقَالَ إِنَّ آدَمَ عَلَيْهِ السَّلَام لَمَّا حَضَرَهُ الْمَوْتُ قَالَ لِبَنِيهِ أَيْ بَنِيَّ إِنِّي أَشْتَهِي مِنْ ثِمَارِ الْجَنَّةِ فَذَهَبُوا يَطْلُبُونَ لَهُ فَاسْتَقْبَلَتْهُمْ الْمَلَائِكَةُ وَمَعَهُمْ أَكْفَانُهُ وَحَنُوطُهُ وَمَعَهُمْ الْفُؤُوسُ وَالْمَسَاحِي وَالْمَكَاتِلُ فَقَالُوا لَهُمْ يَا بَنِي آدَمَ مَا تُرِيدُونَ وَمَا تَطْلُبُونَ أَوْ مَا تُرِيدُونَ وَأَيْنَ تَذْهَبُونَ قَالُوا أَبُونَا مَرِيضٌ فَاشْتَهَى مِنْ ثِمَارِ الْجَنَّةِ قَالُوا لَهُمْ ارْجِعُوا فَقَدْ قُضِيَ قَضَاءُ أَبِيكُمْ فَجَاءُوا فَلَمَّا رَأَتْهُمْ حَوَّاءُ عَرَفَتْهُمْ فَلَاذَتْ بِآدَمَ فَقَالَ إِلَيْكِ إِلَيْكِ عَنِّي فَإِنِّي إِنَّمَا أُوتِيتُ مِنْ قِبَلِكِ خَلِّي بَيْنِي وَبَيْنَ مَلَائِكَةِ رَبِّي تَبَارَكَ وَتَعَالَى فَقَبَضُوهُ وَغَسَّلُوهُ وَكَفَّنُوهُ وَحَنَّطُوهُ وَحَفَرُوا لَهُ وَأَلْحَدُوا لَهُ وَصَلَّوْا عَلَيْهِ ثُمَّ دَخَلُوا قَبْرَهُ فَوَضَعُوهُ فِي قَبْرِهِ وَوَضَعُوا عَلَيْهِ اللَّبِنَ ثُمَّ خَرَجُوا مِنْ الْقَبْرِ ثُمَّ حَثَوْا عَلَيْهِ التُّرَابَ ثُمَّ قَالُوا يَا بَنِي آدَمَ هَذِهِ سُنَّتُكُمْ

हमें बताया है अब्दुल्ला ने हमें बताया है [हुदबाह बिन खालिद] ने हमें बताया है [हम्मद बिन सलामा] [हुमैद] से [हसन] से [उताई] उन्होंने कहा, "मैंने एक बार मदीना में एक बूढ़े व्यक्ति को बात करते देखा, तो मैंने लोगों से पूछा कि वह कौन है। तब उन्होंने उत्तर दिया, "यह [उबै बिन काब] है।" फिर उन्होंने कहा, "वास्तव में आदम अलैहिस्सलाम जब उनकी मृत्यु आई, तो उन्होंने अपने बच्चों से कहा, "ऐ मेरे बच्चों, वास्तव में मुझे स्वर्ग से फल चाहिए।" फिर वे आदम के लिए फल मांगने गए, फिर स्वर्गदूतों ने उनका (आदम) कफ़न और ताबूत ले जाकर उनका अभिवादन किया, जबकि वे (आदम के बच्चे) कुल्हाड़ी, फावड़े और फलों की टोकरियाँ लाए। तब फ़रिश्तों ने उनसे पूछा, "ऐ आदम के बच्चों, तुम क्या चाहते हो और क्या मांगते हो? या एक अन्य रिवायत में है, "तुम क्या चाहते हो और कहाँ जा रहे हो?" उन्होंने उत्तर दिया, "हमारे पिता बीमार हैं और स्वर्ग के फल चाहते हैं।" फ़रिश्तों ने उत्तर दिया, "वापस आओ! "सच में तुम्हारे पिता (मौत) का फ़ैसला हो चुका है।" वे वापस चले गए। जब हवा ने फ़रिश्तों को देखा और वह जान गई कि वे कौन हैं, तो वह आदम की देखभाल करने के लिए उसके पास लौट आई। तब आदम ने हवा से कहा, "मुझसे दूर हो जाओ, तुम्हारी तरफ़ से सिर्फ़ मुझे दिया गया है, इसलिए मेरे और फ़रिश्तों के बीच मेरा रब तबारक व तआला हो।" तो फ़रिश्तों ने उसकी जान ले ली, उसे नहलाया, उसे कफ़न ओढ़ाया, उसके लिए एक गड्ढा और कब्र बनाई, और उसके लिए दुआ की। फिर वे कब्र में गए और आदम को कब्र में लिटा दिया, उन्होंने उसके ऊपर एक ईंट रखी और फिर वे कब्र से बाहर आ गए। उसके बाद उन्होंने उसे मिट्टी से ढक दिया और कहा, "ऐ आदम के बेटे, यह तुम्हारी सुन्नत है।"

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