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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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प्रतिनिधि हदीस
इमाम अहमद : 2415

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أَبِي نَضْرَةَ قَالَ خَطَبَنَا ابْنُ عَبَّاسٍ عَلَى مِنْبَرِ الْبَصْرَةِ فَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّهُ لَمْ يَكُنْ نَبِيٌّ إِلَّا لَهُ دَعْوَةٌ قَدْ تَنَجَّزَهَا فِي الدُّنْيَا وَإِنِّي قَدْ اخْتَبَأْتُ دَعْوَتِي شَفَاعَةً لِأُمَّتِي وَأَنَا سَيِّدُ وَلَدِ آدَمَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا فَخْرَ وَأَنَا أَوَّلُ مَنْ تَنْشَقُّ عَنْهُ الْأَرْضُ وَلَا فَخْرَ وَبِيَدِي لِوَاءُ الْحَمْدِ وَلَا فَخْرَ آدَمُ فَمَنْ دُونَهُ تَحْتَ لِوَائِي وَلَا فَخْرَ وَيَطُولُ يَوْمُ الْقِيَامَةِ عَلَى النَّاسِ فَيَقُولُ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ انْطَلِقُوا بِنَا إِلَى آدَمَ أَبِي الْبَشَرِ فَلْيَشْفَعْ لَنَا إِلَى رَبِّنَا عَزَّ وَجَلَّ فَلْيَقْضِ بَيْنَنَا فَيَأْتُونَ آدَمَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَيَقُولُونَ يَا آدَمُ أَنْتَ الَّذِي خَلَقَكَ اللَّهُ بِيَدِهِ وَأَسْكَنَكَ جَنَّتَهُ وَأَسْجَدَ لَكَ مَلَائِكَتَهُ اشْفَعْ لَنَا إِلَى رَبِّنَا فَلْيَقْضِ بَيْنَنَا فَيَقُولُ إِنِّي لَسْتُ هُنَاكُمْ إِنِّي قَدْ أُخْرِجْتُ مِنْ الْجَنَّةِ بِخَطِيئَتِي وَإِنَّهُ لَا يُهِمُّنِي الْيَوْمَ إِلَّا نَفْسِي وَلَكِنْ ائْتُوا نُوحًا رَأْسَ النَّبِيِّينَ فَيَأْتُونَ نُوحًا فَيَقُولُونَ يَا نُوحُ اشْفَعْ لَنَا إِلَى رَبِّنَا فَلْيَقْضِ بَيْنَنَا فَيَقُولُ إِنِّي لَسْتُ هُنَاكُمْ إِنِّي دَعَوْتُ بِدَعْوَةٍ أَغْرَقَتْ أَهْلَ الْأَرْضِ وَإِنَّهُ لَا يُهِمُّنِي الْيَوْمَ إِلَّا نَفْسِي وَلَكِنْ ائْتُوا إِبْرَاهِيمَ خَلِيلَ اللَّهِ فَيَأْتُونَ إِبْرَاهِيمَ عَلَيْهِ السَّلَام فَيَقُولُونَ يَا إِبْرَاهِيمُ اشْفَعْ لَنَا إِلَى رَبِّنَا فَلْيَقْضِ بَيْنَنَا فَيَقُولُ إِنِّي لَسْتُ هُنَاكُمْ إِنِّي كَذَبْتُ فِي الْإِسْلَامِ ثَلَاثَ كِذْبَاتٍ وَاللَّهِ إِنْ حَاوَلَ بِهِنَّ إِلَّا عَنْ دِينِ اللَّهِ قَوْلُهُ { إِنِّي سَقِيمٌ } وَقَوْلُهُ { بَلْ فَعَلَهُ كَبِيرُهُمْ هَذَا فَاسْأَلُوهُمْ إِنْ كَانُوا يَنْطِقُونَ } وَقَوْلُهُ لِامْرَأَتِهِ حِينَ أَتَى عَلَى الْمَلِكِ أُخْتِي وَإِنَّهُ لَا يُهِمُّنِي الْيَوْمَ إِلَّا نَفْسِي وَلَكِنْ ائْتُوا مُوسَى عَلَيْهِ السَّلَام الَّذِي اصْطَفَاهُ اللَّهُ بِرِسَالَتِهِ وَكَلَامِهِ فَيَأْتُونَهُ فَيَقُولُونَ يَا مُوسَى أَنْتَ الَّذِي اصْطَفَاكَ اللَّهُ بِرِسَالَتِهِ وَكَلَّمَكَ فَاشْفَعْ لَنَا إِلَى رَبِّكَ فَلْيَقْضِ بَيْنَنَا فَيَقُولُ لَسْتُ هُنَاكُمْ إِنِّي قَتَلْتُ نَفْسًا بِغَيْرِ نَفْسٍ وَإِنَّهُ لَا يُهِمُّنِي الْيَوْمَ إِلَّا نَفْسِي وَلَكِنْ ائْتُوا عِيسَى رُوحَ اللَّهِ وَكَلِمَتَهُ فَيَأْتُونَ عِيسَى فَيَقُولُونَ يَا عِيسَى اشْفَعْ لَنَا إِلَى رَبِّكَ فَلْيَقْضِ بَيْنَنَا فَيَقُولُ إِنِّي لَسْتُ هُنَاكُمْ إِنِّي اتُّخِذْتُ إِلَهًا مِنْ دُونِ اللَّهِ وَإِنَّهُ لَا يُهِمُّنِي الْيَوْمَ إِلَّا نَفْسِي وَلَكِنْ أَرَأَيْتُمْ لَوْ كَانَ مَتَاعٌ فِي وِعَاءٍ مَخْتُومٍ عَلَيْهِ أَكَانَ يُقْدَرُ عَلَى مَا فِي جَوْفِهِ حَتَّى يُفَضَّ الْخَاتَمُ قَالَ فَيَقُولُونَ لَا قَالَ فَيَقُولُ إِنَّ مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَاتَمُ النَّبِيِّينَ وَقَدْ حَضَرَ الْيَوْمَ وَقَدْ غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ وَمَا تَأَخَّرَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَيَأْتُونِي فَيَقُولُونَ يَا مُحَمَّدُ اشْفَعْ لَنَا إِلَى رَبِّكَ فَلْيَقْضِ بَيْنَنَا فَأَقُولُ أَنَا لَهَا حَتَّى يَأْذَنَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لِمَنْ شَاءَ وَيَرْضَى فَإِذَا أَرَادَ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى أَنْ يَصْدَعَ بَيْنَ خَلْقِهِ نَادَى مُنَادٍ أَيْنَ أَحْمَدُ وَأُمَّتُهُ فَنَحْنُ الْآخِرُونَ الْأَوَّلُونَ نَحْنُ آخِرُ الْأُمَمِ وَأَوَّلُ مَنْ يُحَاسَبُ فَتُفْرَجُ لَنَا الْأُمَمُ عَنْ طَرِيقِنَا فَنَمْضِي غُرًّا مُحَجَّلِينَ مِنْ أَثَرِ الطُّهُورِ فَتَقُولُ الْأُمَمُ كَادَتْ هَذِهِ الْأُمَّةُ أَنْ تَكُونَ أَنْبِيَاءَ كُلُّهَا فَنَأْتِي بَابَ الْجَنَّةِ فَآخُذُ بِحَلْقَةِ الْبَابِ فَأَقْرَعُ الْبَابَ فَيُقَالُ مَنْ أَنْتَ فَأَقُولُ أَنَا مُحَمَّدٌ فَيُفْتَحُ لِي فَآتِي رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ عَلَى كُرْسِيِّهِ أَوْ سَرِيرِهِ شَكَّ حَمَّادٌ فَأَخِرُّ لَهُ سَاجِدًا فَأَحْمَدُهُ بِمَحَامِدَ لَمْ يَحْمَدْهُ بِهَا أَحَدٌ كَانَ قَبْلِي وَلَيْسَ يَحْمَدُهُ بِهَا أَحَدٌ بَعْدِي فَيُقَالُ يَا مُحَمَّدُ ارْفَعْ رَأْسَكَ وَسَلْ تُعْطَهْ وَقُلْ تُسْمَعْ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ فَأَرْفَعُ رَأْسِي فَأَقُولُ أَيْ رَبِّ أُمَّتِي أُمَّتِي فَيَقُولُ أَخْرِجْ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ كَذَا وَكَذَا لَمْ يَحْفَظْ حَمَّادٌ ثُمَّ أُعِيدُ فَأَسْجُدُ فَأَقُولُ مَا قُلْتُ فَيُقَالُ ارْفَعْ رَأْسَكَ وَقُلْ تُسْمَعْ وَسَلْ تُعْطَهْ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ فَأَقُولُ أَيْ رَبِّ أُمَّتِي أُمَّتِي فَيَقُولُ أَخْرِجْ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ كَذَا وَكَذَا دُونَ الْأَوَّلِ ثُمَّ أُعِيدُ فَأَسْجُدُ فَأَقُولُ مِثْلَ ذَلِكَ فَيُقَالُ لِيَ ارْفَعْ رَأْسَكَ وَقُلْ تُسْمَعْ وَسَلْ تُعْطَهْ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ فَأَقُولُ أَيْ رَبِّ أُمَّتِي أُمَّتِي فَقَالَ أَخْرِجْ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ كَذَا وَكَذَا دُونَ ذَلِكَ

हमें ['अफ्फान] ने हमें [अली बिन ज़ैद] से [अबू नदरोह] से बताया है, उन्होंने कहा: [इब्न अब्बास] ने एक बार बशरोह में पल्पिट पर हमें उपदेश दिया। उन्होंने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: वास्तव में, कोई भी पैगंबर नहीं है जब तक कि उसके पास कोई प्रार्थना न हो जो उसने दुनिया में उपयोग की हो। और वास्तव में मैंने अपनी प्रार्थनाओं को बचा लिया है, ताकि मैं अपने लोगों के लिए मध्यस्थता कर सकूं। मैं न्याय के दिन आदम के बच्चों का नेता हूं, अभिमानी नहीं। मैं भी पहला व्यक्ति था जिसकी कब्र खोली गई थी, ऐसा नहीं कि मैं अभिमानी था। मेरे हाथों में प्रशंसा का झंडा रखा गया है, गर्व का नहीं। एडम और अन्य मेरे ध्वज के नीचे हैं, अभिमानी नहीं। मनुष्यों के लिए, न्याय का दिन बहुत लंबा है, इसलिए उनमें से कुछ दूसरों से कहते हैं: तो वे आदम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और कहा, "ऐ आदम, तुम वही हो जिसे अल्लाह ने अपने हाथ से बनाया और तुम्हें अपनी जन्नत में रखा और फ़रिश्तों को तुम्हारे आगे सजदा किया। तो हमारे रब से हमारी तरफ़ से सिफ़ारिश मांगो और हमारे बीच फ़ैसला कर दो।" आदम ने कहा, "मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ, और मुझे मेरे गुनाहों की वजह से जन्नत से निकाल दिया गया है। और आज मेरे लिए मुझसे ज़्यादा ज़रूरी कोई नहीं है।" लेकिन नूह के पास आओ, जो नबियों में सबसे बड़े थे। तो वे नूह के पास आए और कहा, "ऐ नूह, हमारे रब से हमारी तरफ़ से सिफ़ारिश मांगो और हमारे बीच फ़ैसला कर दो।" नूह ने कहा, "मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ; मैंने अपनी दुआ से धरती के रहने वालों को डुबो दिया है। और मेरे लिए मुझसे ज़्यादा ज़रूरी कोई नहीं है।" लेकिन इब्राहीम के पास आओ, जो अल्लाह के प्यारे थे। तो वे इब्राहीम अलैहि व सल्लम के पास आए, और उन्होंने कहा: ऐ इब्राहीम, हमारे रब से हमारी तरफ़ से सिफ़ारिश मांगो, और हमारे बीच फ़ैसला कर दो। तब उसने उत्तर दिया: असल में मैं तुम्हारे लिए सही व्यक्ति नहीं हूं, असल में मैंने तीन बार झूठ बोला है। और अल्लाह की कसम, उसने ऐसा सिर्फ़ अल्लाह के दीन को बनाए रखने के लिए किया, यानी उसके शब्द "फिर उसने कहा: "सच में मैं बीमार हूँ।" (QS. अश शोफ़ात: 89) और उसके शब्द "... असल में यह बड़ी मूर्ति है जिसने यह किया, तो मूर्तियों से पूछो कि क्या वे बोल सकती हैं।" (QS. अल अंबिया: 63) और जो उसने अपनी पत्नी से कहा जब वह एक राजा के पास आया कि वह मेरी बहन है। और असल में आज मेरे लिए मेरे अलावा कुछ भी ज़्यादा ज़रूरी नहीं है। हालाँकि, मूसा अलैहिस्सलाम आए जिन्हें अल्लाह ने अपने संदेश और शब्दों से महिमा दी थी। तो वे उसके पास आए, और उन्होंने कहा: ऐ मूसा, तुम वही हो जिसे अल्लाह ने अपने संदेश से महिमा दी है और तुम्हें बोलने के लिए बुलाया है, अपने रब से सिफ़ारिश माँगो और हमारे बीच मामलों का फ़ैसला करो। फिर उसने जवाब दिया: असल में, मैं तुम्हारे लिए सही इंसान नहीं हूँ, असल में मैंने एक ऐसी आत्मा को मार डाला है जिसे नहीं मारना चाहिए था। और सच में आज मेरे लिए मुझसे ज़्यादा ज़रूरी कुछ भी नहीं है। लेकिन यीशु के पास आए, जो परमेश्वर की आत्मा थी और उनके शब्द। तो वे जीसस के पास आए और कहा; ऐ जीसस, हमारे रब से कहो कि वह हमारे लिए सिफ़ारिश करे, और हमारे बीच के मामलों का फ़ैसला करे। तब जीसस ने जवाब दिया; सच में, मैं तुम्हारे लिए सही इंसान नहीं हूँ, असल में मुझे अल्लाह के अलावा एक भगवान बनाया गया है। और सच में आज मेरे लिए मुझसे ज़्यादा ज़रूरी कुछ नहीं है। लेकिन, तुम्हें क्या लगता है कि अगर गहने को एक बंद बर्तन में रखा जाए, तो क्या हम ढक्कन खुलने तक अंदर की चीज़ की कीमत जान सकते हैं? उन्होंने कहा: उन्होंने जवाब दिया: नहीं। उन्होंने कहा: तब जीसस ने कहा: सच में, मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पैगंबरों की मुहर हैं, और वह आज भी मौजूद हैं, और उनके सभी पिछले और भविष्य के गुनाह माफ़ कर दिए गए हैं। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: फिर वे मेरे पास आए और कहा: ऐ मुहम्मद, हमारे रब से कहो कि वह हमारे लिए सिफ़ारिश करे और हमारे बीच के मामलों का फ़ैसला करे। तो मैंने जवाब दिया: मुझे ऐसा करने का हक़ है जब तक अल्लाह अज़्ज़ा वजल्ला इसे जिसके लिए चाहे और जिससे खुश हो, इजाज़त न दे। और अगर अल्लाह अज़्ज़ा वजल्ला अपने लोगों में कुछ बताना चाहता है, तो एक आवाज़ आती है जो कहती है, "अहमद और उसके लोग कहाँ हैं?"। हम आखिरी हैं और हम पहले भी हैं, हम आखिरी लोग हैं और हम पहले लोग हैं जिनकी गिनती की जाएगी। फिर दूसरे लोग हमारे रास्ते से हटा दिए गए, और हम अपने चेहरे और हाथ-पैरों पर वुज़ू के निशान चमकते हुए गुज़र गए। तो लोगों ने कहा; इनमें से लगभग सभी लोग पैगंबर बन गए। फिर हम जन्नत के दरवाज़े पर पहुँचे, फिर मैंने दरवाज़ा पकड़ा और खटखटाया, फिर किसी ने पूछा: तुम कौन हो? मैंने जवाब दिया: मैं मुहम्मद हूँ। तो दरवाज़ा खोला गया, फिर मैं अपने रब अज़्ज़ा वजल्ला से मिला जो अपनी कुर्सी या तख़्त पर थे - हम्माद हिचकिचाए - तो मैं नीचे गिर गया और सजदा किया, फिर मैंने उनकी ऐसी तारीफ़ की जो मुझसे पहले या मेरे बाद किसी ने कभी नहीं की थी। फिर मुझसे कहा गया: ऐ मुहम्मद, अपना सिर ऊँचा करो! माँगो तो तुम्हें दिया जाएगा, कहो तो तुम्हारी बात सुनी जाएगी, और सिफ़ारिश माँगो तो वह दी जाएगी! फिर मैंने अपना सिर उठाया और कहा; ऐ मेरे रब, मेरी उम्मत... मेरी उम्मत... तो उन्होंने कहा: उस किसी को भी निकाल दो जिसके दिल में यह या वह नाप है, हम्माद को यह दिल से नहीं पता। फिर मैंने इसे दोहराया, मैंने झुककर वही कहा जो मैंने कहा था। तो मुझसे कहा गया: अपना सिर उठाओ, और बोलो और उसे सुना जाएगा, मांगो और उसे दिया जाएगा और सिफ़ारिश मांगो और वह दी जाएगी। फिर मैंने कहा: ऐ मेरे रब, मेरी उम्मत... मेरी उम्मत... तो उन्होंने कहा: उस किसी को भी निकाल दो जिसके दिल में पहले और दूसरे के अलावा यह या वह नाप है। फिर मैंने इसे फिर से दोहराया, मैंने सजदा किया और पहले की तरह कहा। तो मुझसे कहा गया: अपना सिर उठाओ, बोलो और उसे सुना जाएगा, मांगो और उसे दिया जाएगा और सिफ़ारिश मांगो और वह दी जाएगी। फिर मैंने कहा: ऐ मेरे रब, मेरी उम्मत... मेरी उम्मत... तो उन्होंने कहा: उस किसी को भी निकाल दो जिसके दिल में पहले और दूसरे के अलावा यह या वह नाप है।

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